महानंदा सेतु पर बीएसएफ का युद्धस्तरीय अभ्यास

आशंका है कि उत्तर-पूर्व को देश से अलग-थलग करने की साजिश के तहत आतंकी संगठन महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बना सकते हैं.

आतंकी साजिश से निपटने के लिए बढ़ायी गयी सुरक्षा

कोलकाता. उत्तर-पूर्व के सात राज्यों को देश के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से अहम ‘चिकेन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. बताया जा रहा है कि खुफिया इनपुट के बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सिलीगुड़ी के लाइफलाइन कहे जाने वाले महानंदा पुल पर कड़ा अभ्यास किया. हालांकि, इस बारे में बीएसएफ की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. इससे पहले दिसंबर में जलपाईगुड़ी के तीस्ता पुल पर भी इसी तरह का मॉक ड्रिल किया गया था.

सूत्रों के अनुसार, आशंका है कि उत्तर-पूर्व को देश से अलग-थलग करने की साजिश के तहत आतंकी संगठन महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बना सकते हैं. हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में ‘सेवन सिस्टर्स’ और क्षेत्रीय आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख किया था. इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं. बुधवार सुबह महानंदा पुल के नीचे और आसपास बीएसएफ ने लगभग दो घंटे तक युद्धस्तर पर अभ्यास किया. पुल पर आवागमन आंशिक रूप से नियंत्रित किया गया और संदिग्ध गतिविधियों से नबपटने की तैयारी परखी गयी. अधिकारियों का कहना है कि यह नियमित सुरक्षा कवायद का हिस्सा है, लेकिन रणनीतिक महत्व को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी गयी है.

केंद्रीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब 195 किलोमीटर हिस्से में नदी और भू-आकृतिक जटिलताओं के कारण अब भी पूरी तरह कंटीले तार की बाड़ नहीं लग पायी है. कुछ हिस्सों में बाड़ होने के बावजूद सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं मानी जा रही. खासकर रंगपुर डिवीजन से सटे इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है.

जानकारी के अनुसार,सीमावर्ती क्षेत्रों मेंकुछ कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता और सोशल मीडिया पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भड़काऊ टिप्पणियों ने चिंता बढ़ाई है. विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी क्षेत्रीय तनाव की स्थिति में यह कॉरिडोर सामरिक दबाव का केंद्र बन सकता है. इसी पृष्ठभूमि में बीएसएफ और अन्य एजेंसियों ने संवेदनशील पुलों, रेलवे ट्रैक और रणनीतिक ढांचों की निगरानी बढ़ा दी है. सुरक्षा बलों का कहना है कि उत्तर-पूर्व की कनेक्टिविटी देश की अखंडता से जुड़ा प्रश्न है और किसी भी संभावित खतरे से निबटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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