अभिषेक ने इसीआइनेट व एसआइआर प्रक्रिया पर फिर उठाये सवाल
डायमंड हार्बर के सांसद व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने राज्य में चल रही एसआइआर प्रक्रिया और इसीआइनेट पोर्टल को लेकर फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाये.
डायमंड हार्बर के सांसद व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने राज्य में चल रही एसआइआर प्रक्रिया और इसीआइनेट पोर्टल को लेकर फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाये. शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने इसे ‘ट्रिपल वायलेशन’ बताते हुए कहा कि यह कानून, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग के अपने निर्देशों का उल्लंघन है. श्री बनर्जी ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (इआरओ) अब इसीआइनेट पोर्टल पर एइआरओ की प्रगति की निगरानी नहीं कर पा रहे हैं. उनके अनुसार, यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 13बी और 13सी का उल्लंघन है. धारा 13बी के तहत मतदाता सूची की तैयारी और संशोधन की जिम्मेदारी इआरओ की होती है, जबकि धारा 13सी के अनुसार एइआरओ, इआरओ की सहायता करता है और उसके नियंत्रण में कार्य करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के नौ और 20 फरवरी के आदेशों की भी अवहेलना है. आदेश के अनुसार अंतिम निर्णय केवल इआरओ को लेना है और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी या अनमैप्ड श्रेणी के मामलों में प्राप्त दावों का निबटारा अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के तहत इआरओ द्वारा किया जाना है. तृणमूल सांसद ने चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश संख्या 23/2025-इआरएस का भी हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का इआरओ यह सुनिश्चित करेगा कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति शामिल न हो. उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘ट्रिपल वायलेशन’ संवैधानिक व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार है और इससे मनमाने और अवैध तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने की आशंका पैदा होती है. साथ ही उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे को जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उठाया गया, तो इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. उन्होंने इसे ‘बाबू कल्चर’ करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग का रवैया लोकतांत्रिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं है.
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