भाजपा की मुहर से साबित हो गया कि कौन चला रहा चुनाव आयोग : ममता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के पत्र पर कथित तौर पर भाजपा की मुहर लगी होने के बाद यह बात संदेह से परे साबित हो गयी है कि कौन-सी पार्टी पर्दे के पीछे से आयोग को चला रही है.

संवाददाता, कोलकाता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के पत्र पर कथित तौर पर भाजपा की मुहर लगी होने के बाद यह बात संदेह से परे साबित हो गयी है कि कौन-सी पार्टी पर्दे के पीछे से आयोग को चला रही है.

निर्वाचन आयोग के मार्च 2019 के एक पत्र पर भाजपा की केरल इकाई की मुहर लगी पायी जाने के बाद सोमवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने के लिए उत्तर बंगाल के बागडोगरा रवाना होने से पहले कोलकाता हवाईअड्डे पर पत्रकारों से कहा कि निर्वाचन आयोग की अधिसूचना पर भाजपा की मुहर लगी होने से यह स्पष्ट हो गया है कि पर्दे के पीछे से आयोग को कौन चला रहा है. पोल खुल चुकी है. उन्होंने अपने दावों को सही साबित करने के लिए इस विवाद पर एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर दिखायी. मुख्यमंत्री ने आयोग का जिक्र किये बिना कहा कि पर्दे के पीछे से अपने खेल खेलने की कोई जरूरत नहीं है. खुलकर सामने आयें और हमसे आमने-सामने मुकाबला करें. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा नंदीग्राम के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) का तबादला भवानीपुर में करने के कदम से राजनीतिक साजिश की बू आ रही है. उन्होंने परोक्ष रूप से दावा किया कि बीडीओ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी हैं. उन्होंने कहा : सोमवार को निर्वाचन आयोग ने राज्य के 73 निर्वाचन अधिकारियों का तबादला कर दिया. इससे पहले, उसने बंगाल के लगभग 70 शीर्ष आइएएस और आइपीएस अधिकारियों का तबादला किया, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के मुख्य सचिव शामिल थे. अब हमें पता चल गया है कि इसके पीछे किस पार्टी की भूमिका है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इसे एक गलती बताने के निर्वाचन आयोग के बयान को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई लिपिकीय गलती नहीं है. यह जान-बूझकर राजनीतिक इरादे से किया गया था. उन्होंने दावा किया कि यह पत्र केवल केरल के लिए नहीं था, बल्कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित था. ममता बनर्जी ने कहा कि इस विवाद के बाद चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने सभी पार्टियों से कहा कि वे एक साथ आयें और आयोग की मदद से एक ही पार्टी का शासन लागू करने की कोशिश के खिलाफ लड़ें. उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि विपक्षी दल वामपंथी हैं या दक्षिणपंथी.

मैं उनसे अनुरोध करती हूं कि वे एक साथ आएं, निर्वाचन आयोग समर्थित एकदलीय शासन के खिलाफ विरोध करें, देश में लोकतंत्र को बचायें और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करें.

सोमवार देर रात निर्वाचन आयोग द्वारा पहली पूरक सूची के प्रकाशन पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि घंटों बीत जाने के बाद भी लोगों को यह नहीं पता है कि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया है या हटा दिया गया, क्योंकि सूची की प्रति अभी तक जिला, ब्लॉक या बूथ कार्यालयों में नहीं लगायी गयी है.

उन्होंने कहा कि सोमवार को दो और लोगों ने आत्महत्या कर ली, जिससे एसआइआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के कारण मरने वालों की कुल संख्या लगभग 220 हो गयी है. ममता बनर्जी ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय में उनकी याचिका के परिणामस्वरूप नाम मतदाता सूची में जोड़े गये हैं. ममता बनर्जी ने सूचियों के प्रकाशन में देरी पर सवाल उठाते हुए संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा किया.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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