डीए मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भाजपा ने किया स्वागत

नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दें मुख्यमंत्री: शुभेंदु अधिकारी

नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दें मुख्यमंत्री: शुभेंदु अधिकारी

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) भुगतान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है शुक्रवार को राज्य के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को बकाया 25 फीसदी डीए भुगतान करने का आदेश एक ऐतिहासिक जीत है, जो राज्य के उन सरकारी कर्मचारियों के संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने वर्षों तक राज्य सरकार की हठधर्मी और निर्दयी नीतियों के खिलाफ आवाज उठायी. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस पुराने बयान को भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि डीए कोई अधिकार नहीं है. श्री अधिकारी ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डीए सरकारी कर्मचारियों का वैध अधिकार है. ऐसे में ममता बनर्जी को नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि उनकी सरकार ने कर्मचारियों को लगातार एक वर्ष तक वंचित रखा.

वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को एक बार फिर करारा तमाचा मारा है! उन्होंने कहा कि यह बंगाल के वंचित सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है और उस सरकार को करारा तमाचा है, जिसने कार्निवल पर करोड़ों खर्च किए लेकिन जब अपने कर्मचारियों को उनका बकाया देने के लिए कहा गया तो गरीबी का रोना रोने लगी. श्री मजूमदार ने कहा कि राज्य की असफल सीएम ममता बनर्जी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि राज्य डीए का 50 प्रतिशत का भुगतान नहीं कर सकता क्योंकि इससे “उसकी वित्तीय रीढ़ टूट जायेगी. ” श्री मजूमदार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वास्तविक सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी और उनके करीबी लोगों ने खजाने को पूरी तरह से लूट लिया है. उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला नहीं बनाया होता, तो हमारे कर्मचारियों को अपने उचित बकाए के लिए अदालत से भीख नहीं मांगनी पड़ती. राज्य सरकार ने 2022 में कलकत्ता हाइकोर्ट द्वारा केंद्र सरकार की दरों पर महंगाई भत्ता देने के आदेश को भी नजरअंदाज किया. सरकारी कर्मचारियों को अब सुप्रीम कोर्ट ने न्याय दिया, जबकि ममता बनर्जी ने सिर्फ बहानेबाजी की. यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं है, बल्कि नैतिक भी है. यह हर तृणमूल नेता के लिए चेतावनी है, जो सोचते हैं कि सार्वजनिक धन निजी संपत्ति है. भाजपा हर कर्मचारी, हर युवा, जिसे अवसर से वंचित किया गया है और हर नागरिक के साथ खड़ी है, जिसे इस विफल सरकार ने धोखा दिया है.

वहीं, भाजपा के प्रवक्ता अमित मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सराहना की है. श्री मालवीय ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि यह पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों की बड़ी जीत है. लंबे समय की कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक आदेश दिया है. महंगाई भत्ता रोकने के लिए राज्य सरकार 17 बार स्थगन प्रस्ताव ला चुकी है.

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Published by: Sandip tiwari

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