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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को ‘विकसित बंगाल संकल्प पत्र’ अभियान शुरू किया. इसके तहत पश्चिम बंगाल में इस साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का ‘संकल्प पत्र’ (घोषणापत्र) तैयार करने के लिए जनता से सुझाव मांगे गये हैं. अंतिम ‘संकल्प पत्र’ फरवरी के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है.
बंद कमरे में घोषणा पत्र तैयार करने की प्रथा बंद कर रही भाजपा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने शनिवार को कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी बंद दरवाजों के पीछे चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की पारंपरिक प्रथा खत्म करना चाहती है. कहा कि बंगाल की राजनीति में अक्सर पार्टी के चुनिंदा लोग अंतिम समय में बंद कमरे में घोषणा पत्र तैयार करते हैं.
18 फरवरी तक चलेगा विकसित बंगाल संकल्प पत्र अभियान
शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा का मकसद पश्चिम बंगाल में एक ऐसी सरकार बनाना है, जो वास्तव में राज्य का प्रतिनिधित्व करे. उन्होंने कहा कि ‘विकसित बंगाल संकल्प पत्र’ अभियान 18 फरवरी तक चलेगा. इसके तहत, भाजपा लोगों के सुझाव लेने के लिए 43 संगठनात्मक जिलों में लगभग 1,000 ‘ड्रॉप बॉक्स’ लगायेगी. पार्टी की ओर से मोबाइल वैन का भी इस्तेमाल किया जायेगा.
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10000 प्रतिष्ठित हस्तियों से सुझाव लेगी बीजेपी
सुझाव देने के लिए भाजपा ने एक टोल-फ्री नंबर भी शुरू किया है. इसके अलावा, पार्टी को ई-मेल, व्हाट्सऐप और क्यूआर कोड के माध्यम से भी सुझाव भेजे जा सकेंगे. भाजपा अपने ‘संकल्प पत्र’ के लिए विभिन्न क्षेत्रों की 10,000 प्रतिष्ठित हस्तियों से सुझाव लेने के लिए उन्हें पत्र भेज रही है.
उद्योगपतियों और पेशेवरों के मांगे जा रहे सुझाव
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बताया कि पश्चिम बंगाल को इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, किसानों, पेशेवरों, बेरोजगार युवाओं, उद्योगपतियों और स्टार्टअप से भी सुझाव मांगे जा रहे हैं.
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टीएमसी सरकार की वजह से केंद्रीय योजनाओं से लोग वंचित
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सरकार ने 15 वर्षों से केंद्र के साथ ‘समन्वय की बजाय संघर्ष’ का रास्ता चुना. इसकी वजह से लोगों को कई केंद्रीय योजनाओं का लाभ नहीं मिला. इस टकरावपूर्ण रुख के कारण गरीब आयुष्मान भारत, विश्वकर्मा योजना और ई-श्रम जैसी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाये हैं.
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