बंगाल इलेक्शन की रणनीति पर मंथन, 60 भाजपा विधायकों को बिप्लब देब ने 50 मिनट में क्या-क्या दिये टास्क?

बंगाल चुनाव 2026 की घोषणा इस महीने के अंत तक होने की संभावना है. इसके पहले ही राजनीतिक दलों ने चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उम्मीद है कि इस बार बंगाल में उसकी सरकार जरूर बनेगी. इसलिए अभी से बंद कमरे में बैठकें होने लगीं हैं. बंगाल चुनाव के सह प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने बंगाल में विधायकों के साथ बैठक की और कई निर्देश दिये.

पश्चिम बंगाल में असेंबली इलेक्शन 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने चुनाव की रणनीति पर बंद कमरे में चर्चा की. मंगलवार को पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी. भाजपा के विधायक ने बताया कि बैठक विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के कमरे में हुई. इसमें बंगाल चुनाव के सह प्रभारी बिप्लब देब भी मौजूद थे.

60 विधायकों ने 50 मिनट तक की बैठक

भाजपा विधायक ने बताया कि बैठक 50 मिनट तक चली. बैठक में लगभग 60 विधायक शामिल हुए. उन्हें अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाने के लिए कहा गया. विधायकों से आग्रह किया गया कि वे 24 घंटे ग्राउंड पर मौजूद रहें. बिप्लब देब को बताया गया कि कैसे तृणमूल कांग्रेस सरकार भाजपा नेताओं को क्षेत्र में विकास कार्य करने से रोक रही है.

सभी विधायकों को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आज से जुट जाने को कहा गया था. नामांकन (पार्टी टिकट) के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए यह सही जगह नहीं थी.

अग्निमित्रा पॉल, उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, पश्चिम बंगाल

तृणमूल कांग्रेस का जनाधार घटा – विधायक

विधायकों से देब ने कहा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का जनाधार बहुत कम रह गया है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध की आड़ में पूरे बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह से अराजकता फैला रखी है, उसे जनता के सामने उजागर करें.

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महत्वपूर्ण मोड़ पर बिप्लब को सौंपी बंगाल की जिम्मेदारी

बैठक के दौरान, बिप्लब देब ने विधायकों और शुभेंदु अधिकारी से स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने विधायकों से कहा कि उन्हें बंगाल की जिम्मेदारी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सौंपी गयी है. वह इससे पहले सौंपी गयी किसी भी जिम्मेदारी में कभी असफल नहीं हुए हैं.

ममता बनर्जी सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा ईवीएम में दर्ज हो

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री देब ने भाजपा विधायकों से कहा- मुझे पता है कि आपके पूर्ण समर्पण, भागीदारी और समर्थन से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ममता बनर्जी और उनकी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा ईवीएम में दर्ज हो.

भारी बहुमत से सदन में प्रवेश करेंगे – अग्निमित्रा पॉल

बंद कमरे में हुई बैठक के बारे में कुछ भी बताने से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि बंगाल की स्थिति और चुनाव में उठाये जाने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई. तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में भारी गिरावट को देखते हुए, हम चुनाव के बाद भारी बहुमत से सदन में प्रवेश करेंगे. बिप्लब देब ने हमें आज से ही जुट जाने को कहा है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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