चुंचुड़ा में ''वंदे मातरम'' के रचयिता की मनायी गयी जयंती : गूंज उठा स्वतंत्रता का महामंत्र

राष्ट्रगीत का हुआ सामूहिक गान

राष्ट्रगीत का हुआ सामूहिक गान हुगली. जिले के चुंचुड़ा नगर में रविवार को ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम्’ गीत की रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मदिन पर विविध कार्यक्रमों के माध्यम से एक विशेष और ऐतिहासिक क्षण का उत्सवपूर्वक आयोजन किया गया. जिस शहर के जोड़ाघाट इलाके से स्वतंत्रता संग्राम के रणघोष ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआत हुई थी, वहीं देशभक्ति की भावना फिर से गूंज उठी. इस अवसर पर भारतमाता सेवा समिति के तत्वावधान में सुबह बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. जिसमें कई विशिष्टजन शामिल हुए. बच्चों में भी खासा उत्साह देखा गया. 200 से अधिक बच्चों ने चित्रांकन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. दोपहर बाद आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बंकिमचंद्र के वंशज जयदीप चट्टोपाध्याय, कवि अरण्यक बसु, नजरुल-परिवार की प्रतिनिधि सोनाली काज़ी, प्रख्यात निबंधकार मानबेंद्र मुखोपाध्याय और चिकित्सक अक्षय आढ़्य उपस्थित रहे. कार्यक्रम का विशेष आकर्षण था 150 कलाकारों की सामूहिक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति, जिसने कुछ ही क्षणों में वातावरण को राष्ट्रभक्ति की लहरों से भर दिया. उल्लेखनीय है कि वर्ष 1875–76 में चुंचुड़ा के जोड़ाघाट स्थित बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के निवास पर, भूदेव मुखोपाध्याय, अक्षय सरकार आदि के सहयोग से इस गीत की धुन बनी थी और यहीं से आनंदमठ उपन्यास में पहली बार इसे प्रकाशित किया गया था. इस गीत की शतवार्षिकी वर्ष 1976 में 12 सितंबर को मनायी गयी थी. समिति के सचिव सुबीर नाग ने जानकारी दी कि आगामी 20 दिसंबर को कांठालपाड़ा स्थित बंकिमचंद्र के निवास तक एक विशेष पदयात्रा के माध्यम से अगला आयोजन किया जायेगा. देशभक्ति के इस ऐतिहासिक गीत की जन्मस्थली पर ऐसा गरिमामय आयोजन चुंचुड़ा के लिए गर्व की बात है.

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By SANDIP TIWARI

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