Bengal Voter List : 37 लाख अर्जियां लंबित, केवल 1 लाख निपटीं, जानिए सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने SIR पर क्या दी सफाई

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने खुलासा किया है कि अब तक 38.20 लाख में से केवल 1.02 लाख अपीलों का ही निपटारा हुआ है.

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बताया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत नाम हटाये जाने या जोड़े जाने संबंधी 37 लाख से अधिक अपील अब भी लंबित हैं. निर्वाचन आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित न्यायाधिकरणों ने अब तक दाखिल 38.20 लाख अपील में से करीब 1.02 लाख का ही निपटारा किया है.

क्षेत्रवार ब्योरा सार्वजनिक करने का अनुरोध

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की एसआइआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका पर 17 जुलाई को सुनवाई की थी. याचिका में एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाये गये मतदाताओं की ओर से दाखिल दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार ब्योरा सार्वजनिक करने का अनुरोध किया गया था. पीठ ने इस पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था.

केवल 1,02,231 अपील का निपटारा

निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि मतदाता सूचियों के एसआईआर से संबंधित आदेशों के खिलाफ कुल 38,20,683 अपील दाखिल की गयीं जिनमें से 1,02,231 अपील का निपटारा किया जा चुका है जबकि 37,18,452 अब भी लंबित हैं. हालांकि, हलफनामे में यह अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया कि कितनी अपील मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के खिलाफ और कितनी नाम जोड़े जाने के खिलाफ दाखिल की गयीं.

निपटारे से संबंधित आंकड़े पेश करने का निर्देश

बोस ने याचिका में कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआइआर के गणना चरण के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए थे. उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने के चरण में नाम जोड़ने के लिए प्रपत्र छह और 6ए के जरिये 9.64 लाख आवेदन तथा नाम हटाने के लिए प्रपत्र सात के जरिये 99,000 से अधिक आवेदन मिले थे लेकिन 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में केवल करीब 1.82 लाख नाम जोड़े गये. उच्चतम न्यायालय ने 25 अगस्त को निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़े जाने को चुनौती देने वाली अपीलों के लंबित रहने और उनके निपटारे से संबंधित आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया था.

प्रपत्र छह के तहत 34.13 लाख आवेदन दाखिल

न्यायालय में निर्वाचन आयोग की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद 17 दिसंबर 2025 से सात अगस्त 2026 के बीच प्रपत्र छह के तहत 34.13 लाख आवेदन दाखिल किये गये. प्रपत्र छह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित आवेदन पत्र है. इस आंकड़े में पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए आवेदन करने वाले लोगों के साथ वे मतदाता भी शामिल हैं जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटा दिये गये थे.

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कुल 9 न्यायाधिकरण गठित

उच्चतम न्यायालय ने 24 अप्रैल को अपीलीय न्यायाधिकरणों से कहा था कि एसआइआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाये. करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था. बाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपीलों पर फैसला करने के लिए उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरण गठित किये थे.

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लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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