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Bengal News: कोलकाता. पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की बहुचर्चित ‘पाड़ाय समाधान’ परियोजना पर राज्य की नयी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य के नगर एवं शहरी विकास विभाग ने फिलहाल सभी नगरपालिकाओं में इस परियोजना के तहत चल रहे विकास कार्यों और भुगतान प्रक्रिया को रोक दिया है.
रद्द भी हो सकती है परियोजना
सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इस योजना के तहत हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और वास्तविक आवश्यकता की विस्तृत जांच कराना चाहती है. इसी वजह से जिन परियोजनाओं का टेंडर हो चुका था और ठेकेदारों को कार्यादेश भी मिल गया था, लेकिन विधानसभा चुनाव की घोषणा के कारण काम शुरू नहीं हो पाया, उन परियोजनाओं को भी रद्द कर दिया गया है.
भुगतान पर भी रोक
सिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, चुनाव से पहले सड़क, जल निकासी, पेयजल पाइपलाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी जिन परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ था, उनके भुगतान पर भी फिलहाल रोक लगा दी गयी है. नगर एवं शहरी विकास विभाग का कहना है कि पहले इन परियोजनाओं की जमीनी जांच होगी. यह देखा जायेगा कि काम वास्तव में जरूरी था या नहीं, टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी थी या नहीं और निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं. जांच के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान पर फैसला लिया जायेगा.
पंचायत क्षेत्रों में भी असर
सूत्रों का दावा है कि केवल नगरपालिकाएं ही नहीं, बल्कि पंचायत क्षेत्रों में भी ‘पाड़ाय समाधान’ परियोजना के तहत चल रहे कार्यों और भुगतान को रोका गया है. ग्रामीण विकास विभाग की ओर से भी ऑडिट प्रक्रिया शुरू की गयी है. हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गयी है. कई नगरपालिका अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि फिलहाल मौखिक निर्देश के आधार पर ही कार्रवाई चल रही है.
पुरानी राशि भी वापस ली गयी
सूत्रों के मुताबिक, पिछली सरकार द्वारा विभिन्न नगरपालिकाओं और विभागों को जारी की गयी राशि भी वापस ले ली गयी है. साथ ही कोलकाता नगर निगम के अकाउंट विभाग को निर्देश दिया गया है कि किसी भी ठेकेदार का बिल स्वीकार न किया जाये.
उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित
राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने विभाग के प्रधान सचिव खलील अहमद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है. यह समिति राज्यभर की नगरपालिकाओं में ‘पाड़ाय समाधान’ परियोजना के तहत हुए कार्यों की जांच करेगी. मंत्री ने जांच रिपोर्ट जमा करने के लिए 10 जून तक की समयसीमा तय की है. शुक्रवार से विभिन्न नगरपालिकाओं में ऑडिट और जमीनी निरीक्षण का काम शुरू हो चुका है.
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ठेकेदारों में बढ़ी बेचैनी
सरकारी फैसले के बाद ठेकेदारों में चिंता बढ़ गयी है. कई ठेकेदारों का कहना है कि यदि उनका बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो वे भविष्य में सरकारी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे. सूत्रों के मुताबिक, कुछ ठेकेदार सरकारी वर्क ऑर्डर के दस्तावेज लेकर अदालत जाने की तैयारी भी कर रहे हैं. निर्माण एजेंसियों का आरोप है कि चुनाव से पहले जल्दबाजी में काम कराये गये थे और अब भुगतान रोककर उन्हें आर्थिक संकट में डाला जा रहा है.
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