मुख्य बातें
Rathin Ghosh: कोलकाता. राज्य के नगर निकायों में नियुक्तियों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी के बाद अब पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री रथिन घोष की भूमिका भी जांच एजेंसियों के निशाने पर है. घोष को एक बार फिर तलब किया है. 25 मई को उन्हें सॉल्टलेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित इडी कार्लाय में पेश होने के लिए कहा गया है. यह पहला मौका नहीं है, जब उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया हो. इससे पहले भी कई बार समन जारी हो चुके हैं. पिछले सप्ताह ही वह इडी के समक्ष पेश हुए थे. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इडी बार-बार घोष से क्या जानना चाहती है और जांच एजेंसी की नजर उनके किस कनेक्शन पर टिकी हुई है.
कई बार समन से बचते रहे हैं पूर्व मंत्री
घोष पहले भी कई बार इडी के समन से बचते रहे हैं. कभी स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया तो कभी अन्य वजहें बतायी गयीं. हालांकि पूर्व मंत्री बोस की गिरफ्तारी के बाद पिछले सप्ताह वह इडी दफ्तर पहुंचे थे और उनसे घंटों पूछताछ हुई थी. सूत्रों के अनुसार, एजेंसी को उनके जवाबों में कई विरोधाभास मिले. कुछ सवालों पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के बाद अब दोबारा तलब किया गया है. जांच अधिकारी उनके पुराने बयान, दस्तावेजों और अन्य आरोपियों के बयानों का मिलान कर रहे हैं.
एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क था सक्रिय
जांच एजेंसियों का दावा है कि मामला केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कथित रूप से एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क काम कर रहा था. जांच के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और कथित सिफारिशी कड़ियां सामने आयी हैं, जिनके आधार पर प्रभावशाली नेताओं की भूमिका की जांच की जा रही है. घोष का नाम इसी संदर्भ में बार-बार सामने आ रहा है. नगर निकायों में नियुक्तियों के दौरान कई उम्मीदवारों को कथित राजनीतिक प्रभाव के जरिये नौकरी दिलायी गयी. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि चयन प्रक्रिया में किन नेताओं और अधिकारियों का दबाव था.
मनी ट्रेल भी खंगाल रही इडी
इडी की दिलचस्पी केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसी कथित मनी ट्रेल भी खंगाल रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों का लेन-देन हुआ, पैसा किन रास्तों से पहुंचा और उस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे. इडी का मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ संगठित स्तर पर काम हुआ हो सकता है. इसी वजह से बार-बार पूछताछ के जरिये बयानों का मिलान किया जा रहा है. इडी कुछ कथित सिफारिशी सूचियों और नगर निकाय स्तर के फैसलों की भी जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया में कौन लोग प्रभाव डाल रहे थे और किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया. इसी कारण घोष से लगातार पूछताछ को बेहद अहम माना जा रहा है.
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रथिन बोस को तलब किये जाने के कुछ अहम कारण
- नगर निकायों में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दबाव व सिफारिश के जरिये नियुक्तियां कराने को लेकर तथ्य मिले हैं. घोष लंबे समय तक प्रभावशाली मंत्री और संगठनात्मक नेता रहे हैं, इसलिए उनकी भूमिका की जांच की जा रही है.
- इडी यह पता लगाना चाहती है कि चयन सूची तैयार करने और उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने में किन नेताओं की भूमिका थी.
- नौकरी दिलाने के बदले पैसों का लेन-देन हुआ. ऐसे में जांच एजेंसी घोष व अन्य कुछ लोगों के बैंक ट्रांजैक्शन, संपत्ति और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है.
- पूछताछ के दौरान गिरफ्तार या जांच के दायरे में आये कुछ लोगों ने घोष का नाम लिया है. इन्हीं बयानों का सत्यापन करने के लिए बार-बार तलब किया जा रहा है.
- पिछली पूछताछ में घोष के कुछ जवाबों में विरोधाभास मिला था. जांच में मिले तथ्यों के आधार पर एजेंसी पुराने और नये बयानों का मिलान करना चाहती है.
- घोष पहले कई बार इडी के समन पर पेश नहीं हुए थे और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था. इससे जांच एजेंसी का संदेह और बढ़ा तथा दोबारा पूछताछ जरूरी मानी गयी.
- इडी को कुछ दस्तावेज और कथित सिफारिशी सूचियां मिली हैं. जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या इन सूचियों का संबंध घोष या उनके करीबी लोगों से था.
अब तक 3.45 करोड़ नकद जब्त
इडी ने पहले आरोपी व प्रमोटर अयन शील के परिसरों पर छापेमारी के दौरान कई डिजिटल सबूत, दस्तावेज और नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किये थे. बाद में सुजीत बोस और रथिन घोष के परिसरों में भी तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान 3.45 करोड़ रुपये नकद, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये गये. कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, कमरहट्टी, टीटागढ़, बरानगर, हालीशहर, दक्षिण दमदम और दमदम सहित कई नगरपालिकाओं में मजदूर, क्लर्क, स्वीपर, ड्राइवर, पंप ऑपरेटर, सैनिटरी असिस्टेंट और हेल्पर जैसे पदों पर भी कथित अवैध नियुक्तियां किये जाने के आरोप हैं.
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