बंगाल उपचुनाव: वोटिंग से पहले क्यों बदले गए ISF और AJUP के चुनाव चिह्न? जानें आयोग के फैसले के पीछे की पूरी वजह

पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों को लेकर बड़ा फेरबदल हुआ है. इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) से 'लिफाफा' चिह्न वापस लेकर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) को 'मेज' आवंटित किया गया है. इस फैसले पर ISF ने आपत्ति जताई है.

कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट

नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों को लेकर बदलाव हुआ है. निर्वाचन आयोग ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (आइएसएफ) को ‘लिफाफा’ की जगह ‘आलमारी’ और हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) को ‘बांसुरी’ की जगह ‘मेज’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस के बागी खेमे के ऋतब्रत बनर्जी की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (डीटीसी) को पहले ही ‘लिफाफा’ चिह्न मिल चुका है.

लिफाफा चिह्न को लेकर नौशाद की आपत्ति

भांगड़ से विधायक नौशाद सिद्दिकी वर्ष 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव में ‘लिफाफा’ चिह्न पर जीत चुके हैं. आइएसएफ ने पंचायत और लोकसभा चुनाव भी इसी चिह्न पर लड़ा था. 2021 में पार्टी के गठन के बाद स्थायी चिह्न नहीं मिलने पर उसने बिहार की राष्ट्रीय सेकुलर मजलिस पार्टी के ‘लिफाफा’ चिह्न का इस्तेमाल किया था. अब यह चिह्न डीटीसी को मिलने के बाद नौशाद ने आयोग को पत्र भेजकर आपत्ति जतायी है. उन्होंने फैसले को कलकत्ता हाइकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.

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एजेयूपी को मिला नया चिह्न

हुमायूं कबीर ने तृणमूल छोड़ने के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी बनायी थी. 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को ‘बांसुरी’ चिह्न मिला था. कबीर ने रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने रेजिनगर सीट छोड़ दी. अब होने वाले उपचुनाव में उनके बेटे गुलाम नबी आजाद (रॉबिन) एजेयूपी के प्रत्याशी हैं.

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By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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