शुभेंदु अधिकारी सरकार के लिए क्यों परेशानी का सबब बन गयी ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना?

Annapurna Bhandar Scheme Challenge: पश्चिम बंगाल में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है. 3,000 रुपए के वादे, 12 पन्नों के फॉर्म और पैसे मिलने में देरी से महिलाओं का गुस्सा फूट रहा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Annapurna Bhandar Scheme Challenge: पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ममता बनर्जी सरकार की लोकप्रिय ‘लक्ष्मी भंडार’ (Lakshmir Bhandar) योजना की तर्ज पर महिलाओं को प्रतिमाह 3,000 रुपए देने वाले ‘अन्नपूर्णा भंडार' (Annapurna Bhandar) योजना का ऐलान किया था. सत्ता में आने के बाद शुभेंदु अधिकारी सरकार ने योजना को लागू किया. लेकिन, यह योजना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है.

3,000 रुपए का वादा और उम्मीदों का दबाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के दौरान भाजपा नेतृत्व ने महिलाओं को भरोसा दिया था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की 1,500 रुपए वाली ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना बंद नहीं होगी. इसका नाम ‘अन्नपूर्णा भंडार’ करके राशि डबल यानी 3,000 रुपए कर दी जायेगी. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी की सरकार के गठन के बाद भुगतान प्रक्रिया में आ रही अड़चनों ने सीधे तौर पर करोड़ों महिला लाभार्थियों को आशंकित कर दिया है.

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12 पेज का फॉर्म और दस्तावेजों का सख्त सत्यापन

शुभेंदु अधिकारी सरकार का दावा है कि ममता बनर्जी की सरकार में करीब 30 लाख अयोग्य या फर्जी खाते जुड़े हुए थे. फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब बैंक खातों के साथ-साथ आधार लिंकिंग, भूमि स्वामित्व विवरण, पारिवारिक आय प्रमाण-पत्र, जीएसटी पंजीकरण और यहां तक कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA)/नागरिकता से जुड़े सवालों को शामिल किया गया है. इसके लिए 12 पेज का आवेदन फॉर्म जारी हुआ. ग्रामीण इलाके की गरीब महिलाओं के लिए इतने कागजात जुटाना और इतना बड़ा फॉर्म भरना चुनौती बन गया.

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‘लक्ष्मी भंडार’ का फंड रुकने से बढ़ा जनाक्रोश

फॉर्म का सख्ती से सत्यापन (Verification) और नये फॉर्म भरने की प्रक्रिया के चलते पुरानी व्यवस्था के तहत महिलाओं के खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं. ऐसी महिलाओं की संख्या भी हजारों में है. इसके बाद मेदिनीपुर, बीरभूम, कूचबिहार, पुरुलिया और कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं ने सरकारी कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

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राजनीतिक घेराबंदी और विपक्ष का हमला

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए बड़े-बड़े वादे तो कर दिये, लेकिन अब जटिल नियमों और कागजी कार्रवाई के बहाने लाखों महिलाओं को योजना के लाभ से वंचित करने का रास्ता खोज रही है.

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जरूरतमंदों को पैसे देने के लिए गहन सत्यापन जरूरी : सरकार

राज्य सरकार का तर्क है कि पारदर्शी और सही लाभार्थियों तक राशि पहुंचाने के लिए गहन सत्यापन जरूरी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और कैबिनेट मंत्रियों ने आश्वासन दिया है कि चरणबद्ध तरीके से सत्यापन पूरा होते ही सभी योग्य महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जायेगी. अग्निमित्रा पॉल और दिलीप घोष जैसे मंत्रियों ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस जान-बूझकर महिलाओं को प्रदर्शन के लिए उकसा रही है. अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत करेंगी.


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By मिथिलेश झा

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