अब चिड़ियाघर के दत्तक पशु-पक्षियों की निगरानी कर सकेंगे अभिभावक

वन विभाग ने चिड़ियाघर के दत्तक पशु-पक्षियों के भोजन और देखभाल की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया है. इसके जरिये जानवरों के अभिभावक अब यह देख सकेंगे कि उनके दत्तक वन्यजीवों का क्या हाल है. इस सॉफ्टवेयर की मदद से वे अपनी शिकायत भी दर्ज करवा सकेंगे.

चिड़ियाघरों में बाघ, शेर, पक्षी समेत अन्य वन्यजीवों को दत्तक लेने वाले अभिभावक अब उनके भोजन और देखभाल पर नजर रख सकेंगे. वन विभाग ने ऐसी व्यवस्था शुरू करने की पहल की है, जिसके जरिये दार्जिलिंग से लेकर सुंदरबन तक चिड़ियाघरों और वन्यजीव पार्कों में रह रहे दत्तक पशु-पक्षियों के खान-पान की निगरानी की जा सकेगी.

दरअसल, कई लोग चिड़ियाघर के पशु-पक्षियों को दत्तक लेते हैं और इसके लिए चिड़ियाघर प्रबंधन को बड़ी राशि देते हैं. इस राशि से संबंधित वन्यजीवों के भोजन, इलाज और देखभाल का खर्च उठाया जाता है. हालांकि, कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं कि दत्तक लिये गये पशु-पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है.

अब तक अभिभावकों के पास इन शिकायतों की सच्चाई जानने का कोई माध्यम नहीं था. वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने बताया कि चिड़ियाघरों में रहने वाले पशु-पक्षियों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है या नहीं, वे भोजन कर रहे हैं या उसे नष्ट कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं पर नजर रखी जायेगी. इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया जायेगा.

इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से राज्य के सभी चिड़ियाघरों और वन्यजीव पार्कों में पशु-पक्षियों के निर्धारित आहार की निगरानी अरण्य भवन से की जा सकेगी. उन्होंने बताया कि दत्तक लेने वाले अभिभावक भी अरण्य भवन आकर अपने दत्तक पशु-पक्षियों के भोजन की जानकारी देख सकेंगे. इसके अलावा आम लोगों को भी यह सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है.

कूचबिहार, बर्दवान के रमना बागान और अलीपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों को दत्तक लेने वाले आइपीएस अधिकारी द्युतिमान भट्टाचार्य ने इस पहल का स्वागत किया है. अलीपुर चिड़ियाघर में वे एक लकड़बग्घे के अभिभावक हैं. उन्होंने कहा कि दत्तक लिये गये वन्यजीव उनके लिए संतान समान हैं, लेकिन हमेशा उनके पास जाना संभव नहीं होता. ऐसे में उनके भोजन की निगरानी की सुविधा मिलना अच्छा कदम होगा.

वन विभाग के अनुसार, चिड़ियाघरों में हर जीव का आहार अलग-अलग होता है. बाघ और शेर को जितना मांस दिया जाता है, उतना लकड़बग्घे और लोमड़ी को नहीं दिया जाता. हाथी, गैंडा, दरियाई घोड़ा, चिंपैंजी, भालू और पक्षियों के लिए भी अलग-अलग भोजन तय होता है. रोजाना चिड़ियाघरों में बड़ी मात्रा में मांस, फल, सब्जियां, अंडे और सूखे मेवे पहुंचते हैं. इनके भोजन पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है.

चिड़ियाघरों में पशु-पक्षियों के भोजन को लेकर अनियमितता और चोरी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं. कई बार दर्शकों ने भी आरोप लगाया है कि वन्यजीवों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा. इसी को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया है. वन मंत्री ने कहा कि हर चिड़ियाघर में रोज जाकर निगरानी करना संभव नहीं है. इसलिए एक ‘एकल खिड़की’ व्यवस्था के माध्यम से निगरानी की जायेगी.

इसमें प्रत्येक पशु-पक्षी का डाइट चार्ट मौजूद रहेगा और उसी के अनुसार भोजन का वजन कर पिंजरे में दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु-पक्षी को तय मात्रा से कम भोजन दिया जाता है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. वहीं, यदि कोई जीव भोजन नहीं खा रहा है तो इसका कारण भी पता लगाया जायेगा. जरूरत पड़ने पर उसके आहार में बदलाव किया जायेगा. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वन्यजीवों के स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा.


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By Amit sharma

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