जेयू के शिक्षक के विरुद्ध की गयी कार्रवाई की सिफारिश

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह धार्मिक प्रोफाइलिंग को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करता.

अल्पसंख्यक आयोग की पहल

कोलकाता. पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के एक शिक्षक के खिलाफ उत्पीड़न के आरोपों को लेकर कार्रवाई की सिफारिश की है. वेस्ट बंगाल माइनरिटी कमीशन के चेयरमैन अहमद हसन इमरान ने कहा कि यदि जांच जारी रहने के दौरान संबंधित विभागाध्यक्ष को पद पर बने रहने दिया गया, तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह धार्मिक प्रोफाइलिंग को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करता.

आयोग की टीम ने सिफारिश की है कि जेयू के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष को तब तक कैंपस से दूर रखा जाये, जब तक परीक्षा के दौरान दो छात्राओं के साथ कथित उत्पीड़न के आरोपों की जांच पूरी नहीं हो जाती. आरोप है कि इनविजिलेशन के दौरान एक खास समुदाय की दो छात्राओं को परेशान किया गया था. इन शिकायतों की जांच के लिए आयोग की टीम ने कैंपस का दौरा भी किया था.

अहमद हसन इमरान ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में सौहार्द्र और शांति का माहौल होना चाहिए. कार्रवाई न होने की स्थिति में विश्वविद्यालय की छवि पर गलत असर पड़ सकता है, जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय धार्मिक सहअस्तित्व का सम्मान करने के लिए जाना जाता है.

इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी सिफारिशें विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को सौंप दी हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वाइस चांसलर चिरंजीव भट्टाचार्य ने कहा कि आयोग की किसी भी सिफारिश पर निर्णय सभी हितधारकों से चर्चा के बाद लिया जायेगा. वहीं, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष शाश्वती हाल्दार ने आयोग की सिफारिश को गलत और दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा कि उनसे उनका पक्ष नहीं पूछा गया. उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ छात्रों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और इसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी है, लेकिन विभागाध्यक्ष और परीक्षा की प्रिजाइडिंग ऑफिसर के रूप में अपनी ड्यूटी निभाने को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है.

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By GANESH MAHTO

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