कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नीली बत्ती लगी कार को लापरवाही से चलाने और यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोप में एक नाबालिग के खिलाफ दर्ज सभी कार्रवाई को रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) कानून द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर वैधानिक जांच पूरी करने में विफल रहा, इसलिए आगे की कार्रवाई कानूनन टिकाऊ नहीं है. यह घटना 26 नवंबर 2023 की है, जब शहर के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक नाबालिग को नीली बत्ती लगी कार चलाते हुए रोका गया था. आरोप था कि वह लापरवाही से वाहन चला रहा था और सड़क यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहा था. कार के डैशबोर्ड पर एक तख्ती लगी थी, जिस पर ‘जज’ लिखा हुआ था. पुलिस द्वारा रोके जाने पर नाबालिग ने स्वीकार किया था कि उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है और वह कार उसके दादा की है, जो एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं.
इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, ‘जज’ लिखी तख्ती के जरिए झूठे प्रतिरूपण, तथा किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत मामला दर्ज किया था. नाबालिग पहली बार नवंबर 2023 में किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश हुआ था.
