मुख्य बातें
Abhishek Banerjee: कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान बुधवार को है. सोमवार की शाम प्रचार का शोर थम गया. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी में नंबर दो पोजिशन रखनेवाले सांसद अभिषेक बनर्जी ने 23 मार्च से 27 अप्रैल तक चले 36 दिनों के चुनाव अभियान में करीब 100 विधानसभा सीटों पर जनसभाएं और रोड शो किये. उनके इस व्यापक दौरे की जितनी चर्चा हुई, उतनी ही उन सीटों को लेकर भी चर्चा तेज है, जहां वह नहीं पहुंचे.
किन सीटों पर नहीं गये
उनके दौरे से बाहर रहीं सीटों में फिरहाद हकीम की कोलकाता पोर्ट, अरूप विश्वास की टॉलीगंज, ज्योतिप्रिय मल्लिक की हाबरा और ब्रात्य बसु की दमदम, इंद्रनील सेन की चंदननगर सीट शामिल हैं. इसके अलावा कुणाल घोष की बेलियाघाटा, मदन मित्रा की कमरहट्टी और नयना बंद्योपाध्याय की चौरंगी सीट भी सूची में हैं.
राजनीतिक अटकलें तेज
अभिषेक बनर्जी को इस बार पार्टी ने मुख्य रूप से दक्षिण बंगाल में प्रचार का जिम्मा सौंपा था. यह इलाका तृणमूल का गढ़ माना जाता है. राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘नवीन बनाम प्रवीण’ बहस से जोड़ कर देख रहे हैं. हालांकि अभिषेक अपने कुछ करीबी नेताओं के क्षेत्रों में भी नहीं गये, जिससे तस्वीर एकतरफा नहीं मानी जा रही.
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या कहना है तृणमूल का
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि 294 सीटों वाले राज्य में हर जगह जाना संभव नहीं, इसलिए जिम्मेदारी बांटी गयी. जिन सीटों पर अभिषेक नहीं गये, वहां अधिकतर जगह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रचार किया. इस बार उत्तर बंगाल पर विशेष फोकस रहा. टिकट वितरण में भी बड़े बदलाव दिखे, जहां 74 विधायकों के टिकट काटे गये. इसे संगठनात्मक सुधार की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
Also Read: अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला,लगाया चुनाव आयोग से साठगांठ का आरोप
