यह सिस्टम लगने के बाद अगर मछुआरे किसी मुसीबत में फंसते हैं, तो वे इस तकनीक द्वारा फौरन कोस्ट गार्ड से संपर्क कर पायेंगे. यंत्र का एक बटन दबाते ही फौरन उनका संपर्क कोस्ट गार्ड से हो जायेगा, फलस्वरूप कोस्ट गार्ड को मछुआरों की मदद के लिए कदम उठाने में सहायता मिलेगी. केवल ट्रॉलर ही नहीं, मछली पकड़ने के इस्तेमाल में काम आनेवालीं छोटी नावाें में भी इस यंत्र को लगाया जायेगा. मत्स्य विभाग ने इस बीच यह काम आरंभ भी कर दिया है.
इसके साथ ही अलार्म का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए मछुआरों को सजग व जागरूक करने के लिए भी विभाग की आेर से कई कदम उठाये गये हैं. गलत इस्तेमाल करनेवाले ट्रॉलर के मालिकों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. राज्य सरकार अलार्म का बार-बार गलत इस्तेमाल करनेवाले फिशिंग ट्रॉलरों का लाइसेंस भी रद्द कर सकती है. कई बार यह देखने में आया है कि मछुआरे किसी वैध कारण के बगैर भी अलार्म बजा देते हैं. इससे पहले, राज्य सरकार समुद्र में जलदस्यु के हमले में किसी मछुआरे की मौत होने पर उसके परिजन को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान कर चुकी है. मछुआरों के लिए पेंशन परियोजना भी आरंभ की गयी है.
