मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की 24वीं पार्टी कांग्रेस आज से

नये महासचिव का चुनाव, पार्टी को मजबूत करना शीर्ष एजेंडे में

नये महासचिव का चुनाव, पार्टी को मजबूत करना शीर्ष एजेंडे में

संवाददाता, कोलकाता

तमिलनाडु के मदुरै में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की बुधवार से होने वाली 24वीं पार्टी कांग्रेस में नये महासचिव के चुनाव के अलावा पार्टी को मजबूत करने, उसका जनाधार और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा. दो से छह अप्रैल तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे पर चर्चा, समीक्षा की जायेगी और इसे स्वीकृति दी जायेगी. इसमें माकपा का जनाधार बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया है. इसमें कहा गया है कि लोकसभा के नतीजों से पता चलता है कि पार्टी का जनाधार और प्रभाव नहीं बढ़ा है.

मार्च में माकपा पोलित ब्यूरो समन्वयक प्रकाश करात ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के जनाधार में कमी आना, उसकी चुनावी ताकत में गिरावट का एक प्रमुख कारण है. माकपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में 52 उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से उसने चार सीटें जीतीं. पार्टी ने तमिलनाडु में मदुरै और डिंडीगुल, केरल में अलाथुर और राजस्थान में सीकर सीट पर जीत दर्ज की थी. वाममोर्चा 2011 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से और 2018 में त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हार गया और 2014 में लोकसभा में माकपा की सीट की संख्या घटकर नौ रह गयी. 2019 में माकपा के केवल तीन सांसद निचले सदन के लिए निर्वाचित हुए. वर्ष 2004 में, सबसे बेहतरीन प्रदर्शन में माकपा के 43 सदस्य लोकसभा पहुंचे थे और पार्टी का वोट प्रतिशत 5.4 रहा था.

केरल में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की सहयोगी कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से चुनौती का सामना कर रही माकपा केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के विरोधी दलों के साथ सहयोग की बारीकियों पर भी चर्चा करेगी. मसौदा राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी संसद में और संसद के बाहर सहमत मुद्दों पर ‘इंडिया’ में शामिल दलों के साथ सहयोग करेगी. प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि माकपा उन क्षेत्रीय दलों के साथ सहयोग करेगी, जो भाजपा का विरोध करते हैं तथा जहां ऐसे क्षेत्रीय दल राज्य सरकारों का नेतृत्व करते हैं, वहां पार्टी ऐसी किसी भी ऐसी नीति का समर्थन करेगी, जिससे लोगों को लाभ हो.मसौदा प्रस्ताव में भाजपा शासन के तहत ‘नव-फासीवादी विशेषताओं’ में वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि प्रतिक्रियावादी हिंदुत्व एजेंडा लागू करने का दबाव व विपक्ष और लोकतंत्र को दबाने की सत्तावादी कोशिशें नव-फासीवादी विशेषताओं को प्रदर्शित करती हैं.

पार्टी द्वारा प्रसारित एक नोट में स्पष्ट किया गया कि वह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को ‘नव-फासीवादी’ नहीं मानती, लेकिन इसमें ‘नव-फासीवादी विशेषताओं’ की अभिव्यक्तियां मौजूद हैं. मदुरै के तामुक्कम मैदान में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में देश में फासीवाद-विरोध, विविधता और कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास पर एक प्रदर्शनी भी होगी. केंद्रीय समिति के सदस्यों के लिए 75 वर्ष की उम्र सीमा तय किये जाने के साथ ही वामपंथी पार्टी की निर्णय लेने वाले शीर्ष इकाई की संरचना में भी बदलाव की संभावना है. विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के रुख पर विचार-विमर्श और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के अलावा, निवर्तमान केंद्रीय समिति नये सदस्यों के चुनाव के लिए नामों के एक पैनल की सिफारिश करेगी. केंद्रीय समिति अपने सदस्यों में से महासचिव सहित एक पोलित ब्यूरो का भी चुनाव करेगी. पिछले साल सीताराम येचुरी के निधन के बाद महासचिव का पद खाली हो गया था, जिसके बाद करात ने अंतरिम समन्वयक के रूप में कार्यभार संभाला.

वर्तमान में माकपा पोलित ब्यूरो में 16 सदस्य और केंद्रीय समिति में 83 सदस्य हैं. माकपा संविधान के अनुसार, पार्टी कांग्रेस का आयोजन आम तौर पर हर तीन साल में एक बार होता है.

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Published by: Sandip tiwari

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