बंगाल सरकार शरणार्थी कॉलोनियों को नियमित करेगी : ममता बनर्जी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सोमवार को ऐलान किया कि निजी और केंद्र सरकार की जमीन पर बसी शरणार्थियों की कॉलोनियों को नियमित करने की कोशिश की जाएगी. केंद्र की ओर से देशभर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) प्रक्रिया कराने की घोषणा की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार का यह निर्णय आया है. बनर्जी […]

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सोमवार को ऐलान किया कि निजी और केंद्र सरकार की जमीन पर बसी शरणार्थियों की कॉलोनियों को नियमित करने की कोशिश की जाएगी.

केंद्र की ओर से देशभर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) प्रक्रिया कराने की घोषणा की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार का यह निर्णय आया है. बनर्जी ने कहा कि विस्थापित लोगों को तृणमूल कांग्रेस सरकार भूमि का अधिकार देगी. यह फैसला जाहिर तौर पर भाजपा को शिकस्त देने की कोशिश है, क्योंकि भगवा खेमा नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित करा कर उसे भुनाने की कोशिश में लगा हुआ है। यह विधेयक संसद के इसी सत्र में पेश किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा, हमने शरणार्थियों की कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय किया है, क्योंकि लंबा वक्त हो गया है। करीब 50 साल हो गए हैं. (मार्च) 1971 से, उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिला है. बनर्जी ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि राज्य सरकार सरकारी जमीन पर बसी शरणार्थियों की 94 कॉलोनियों को पहले नियमित कर चुकी है.

बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार और निजी लोगों की जमीनों पर कई शरणार्थी कॉलोनियां हैं. हम लंबे वक्त से कह रहे हैं कि इन कॉलोनियों को नियमित किया जाए और लोगों को भूमि का कब्जा दिया जाए.

बहरहाल, उन्हें जमीन खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की जमीन पर क्रमश: 13,000 और 12,000 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं. उन्हें इस फैसले से फायदा होगा. बनर्जी ने नया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास आयोग गठित करने का भी फैसला किया। पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों का एक तबका अनुसूचित जाति से संबंधित है.

बनर्जी एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रही हैं. उधर, बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने का तृणमूल पर आरोप लगाते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्य में एनआरसी को लागू किया जाएगा.

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