कोलकाता : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को नकारने वाली ममता बनर्जी सरकार अब ‘जल जीवन मिशन’ का हिस्सा बनेगी. राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग (पीएचइ) विभाग ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है. इस परियोजना में शामिल होने की समीक्षा की जा रही है.
पीएचइ राज्य में 1.37 करोड़ यानी 90 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाइप जलापूर्ति योजनाओं के तहत लाने की आवश्यकताओं का आकलन कर रहा है.मूल्यांकन में इंजीनियरिंग और वित्तीय आवश्यकताएं शामिल हैं.
राज्य सरकार योजनाओं पर हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, ताकि केंद्र की योजनाओं के तहत किसानों को सस्ता अनाज, स्वास्थ्य बीमा और प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके.अब बंगाल सरकार अगर जल जीवन मिशन में शामिल होती है तो इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति में काफी मदद मिलेगी.
इसके पहले ममता सरकार ‘आयुष्मान भारत’, और ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा ‘जैसी केंद्रीय योजनाओं में शामिल होने से इंकार कर चुकी है.इसकी वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री को स्पीड ब्रेकर कहा था.
