मुर्शिदाबाद/कोलकाता/श्रीनगर : मुर्शिदाबाद जिले के बहालनगर और ब्राह्मणी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. कश्मीर घाटी के कुलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों के हमले में यहां के पांच श्रमिकों की मौत के बाद दोनों गांव मातम में डूब गये हैं. परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. आतंकवादियों ने मंगलवार को मुर्शिदाबाद जिले के रफीक […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
मुर्शिदाबाद/कोलकाता/श्रीनगर : मुर्शिदाबाद जिले के बहालनगर और ब्राह्मणी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. कश्मीर घाटी के कुलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों के हमले में यहां के पांच श्रमिकों की मौत के बाद दोनों गांव मातम में डूब गये हैं. परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. आतंकवादियों ने मंगलवार को मुर्शिदाबाद जिले के रफीक शेख (28), कमरुद्दीन शेख (30), मुरसलीन शेख (30), नइमुद्दीन शेख (30) और रफीकुल शेख (30) को अपहरण करने के बाद कतार में खड़ा कर गोली मार दी थी.
हमले में जहीरुद्दीन गंभीर रूप से घायल हो गये. उनका इलाज चल रहा है. उधर, बुधवार रात मारे गये तीन श्रमिकों के शव विमान से कोलकाता लाये गये. बाद में शववाही गाड़ी में शवों को मुर्शिदाबाद भेजा गया. जानकारी के अनुसार कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम भी शवों को लेकर मुर्शिदाबाद गये हैं. मुर्शिदाबाद के सागरदीघी में मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा. जानकारी के अनुसार सेब तोड़ने का काम कर कुछ हजार की राशि अर्जन के लिए पीड़ित कश्मीर गये थे. अब भी वहां काफी संख्या में श्रमिक फंसे हुए हैं.
बुधवार को कमरुद्दीन को लौटना था घर, नहीं जाना चाहते थे कश्मीर: मरनेवालों में सबसे दुर्भाग्यशाली कमरुद्दीन रहे. उनको बुधवार को ही घर वापसी की ट्रेन पकड़नी थी. कमरुद्दीन की विधवा अजिदा बीबी बताती हैं : सोमवार को ही उनसे बात हुई थी. उन्होंने वहां हालात खराब होने की बात कहते हुए बुधवार को ट्रेन पकड़ कर घर लौटने की बात कही थी.
मंगलवार रात को टीवी पर खबर देखने के बाद अजिदा ने कई बार कमरुद्दीन को फोन किया, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिला. उसी समय वह किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठी थीं. कमरुद्दीन के एक परिजन फिरोज शेख बताते हैं : घाटी में उपद्रव और अशांति को ध्यान में रखते हुए कमरुद्दीन इस साल वहां नहीं जाना चाहता था, लेकिन बाकी युवकों के राजी होने पर वह महज 15 दिनों के लिए गया था. यहां लौट कर नवंबर के पहले सप्ताह से उसे खेतों में धान की कटाई करनी थी. लेकिन होनी को शायद कुछ और मंजूर था.
कौन जानता था मेरे बेटे का आखिरी दौरा साबित होगा :गफूर
बहालनगर के रहने वाले रफीक शेख के पिता गफूर कहते हैं : क्या करें? यहां कोई काम नहीं है. इसी वजह से सेब तोड़ने के सीजन में गांव के बहुत से युवक दो-तीन महीने के लिए कश्मीर घाटी में जाते हैं.
कौन जानता था कि यह मेरे बेटे का आखिरी दौरा साबित होगा? एक अन्य मृतक रफीकुल शेख के पिता सादिकुल ने बताया : रफीकुल 27 दिन पहले ही कश्मीर गया था.
पीड़ितों से मिले अधीर, गृहमंत्री से की बात: बुधवार सुबह से ही कांग्रेस नेता अधीर चौधरी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग हरसंभव सहायता के आश्वासन के साथ पीड़ितों के घर पहुंचे. अधीर ने बुधवार सुबह बहालपुर जाकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की. चौधरी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बात कर बंगाल के लोगों को कश्मीर में सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की तथा हेल्पलाइन भी शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा: केंद्र सरकार घाटी में सब कुछ सामान्य होने का झूठा दावा करती रही है. सरकार की बातों पर भरोसा कर ही इलाके के कई युवक इस बार वहां गये थे, लेकिन इस घटना से साफ है कि वहां हालात सामान्य नहीं हैं.
तृणमूल कांग्रेस के मुर्शिदाबाद जिले के एक नेता जहीरुल शेख बताते हैं : इलाके के सैकड़ों युवक मजदूरी के लिए घाटी में जाते रहे हैं. अब सरकार प्रयास करेगी कि उनको यहीं रोजगार मिले ताकि युवकों को जान हथेली पर लेकर घाटी में नहीं जाना पड़े. सागरदीघी के तृणमूल विधायक सुब्रत साहा कहते हैं : यह बेहद दुखद घटना है. हम पीड़ित परिवारों के साथ हैं.