“जानलेवा नहीं है स्तन कैंसर”

कोलकाता : स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले, मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यह धारणा सही नहीं है. भारत में हर साल करीब 1.40 लाख महिलाएं स्तन कैंसर की चपेट में आ रही हैं. यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि […]

कोलकाता : स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले, मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यह धारणा सही नहीं है. भारत में हर साल करीब 1.40 लाख महिलाएं स्तन कैंसर की चपेट में आ रही हैं. यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाये जाते हैं.

स्तन कैंसर को समझना आसान है, महिलाएं खुद भी स्तन कैंसर की जांच कर सकती हैं. स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे (अंडर आर्म्स) गांठ होना, स्तन कैंसर के संकेत हैं.

हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना ले ले. ये बातें अपोलो हॉस्पिटल के कैंसर रोग विशेष डॉ सैकत गुप्ता ने कहीं. वह मंगलवार को महानगर के प्रेस क्लब में अस्पताल की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे. उन्होंने बताया कि स्तन में गांठ, सूजन या फिर किसी भी तरह का बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें.
डॉ गुप्ता ने कहा कि साल 1980 या इससे पहले स्तन कैंसर के फर्स्ट स्टेज में 60 फीसदी महिलाएं ही इस बीमारी से उबर पाती थीं लेकिन कई शोध के बाद कैंसर के इलाज के क्षेत्र में काभी विकास हुआ है. अब फर्स्ट स्टेज में 95 फीसदी सफल उपचार हो रहा है. इसी तरह दूसरे व तीसरे स्टेज में पहुंच चुके मरीजों का 80 व 60 फीसदी मामलों में सफल उपचार किया जा रहा है.
हालांकि बदलते दौर में अपने लाइफ़ स्टाइल को ज़रूरत से ज़्यादा बदलना भी स्तन कैंसर का कारण बन सकता है इसलिए 40 की उम्र के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी ज़रूर करवानी चाहिए लेकिन अक्सर मेमोग्राफी टेस्ट का नाम सुनकर महिलाएं डरती हैं, लेकिन इस टेस्ट से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. अपोलो हॉस्पिटल में कैंसर की चिकित्सका के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की एक टीम है.

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