तृणमूल कांग्रेस ने इसे लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने का किया है फैसला
संसदीय कार्य मंत्री सह शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने इस बाबत रखा है प्रस्ताव
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने माकपा व कांग्रेस का साथ चाहती है और इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है और साथ ही तृणमूल कांग्रेस ने माकपा व कांग्रेस से इस प्रस्ताव का समर्थन करने का आवेदन किया है.
उल्लेखनीय है कि राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द रक्षा का हवाला देते हुए विधानसभा में बहस के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है. सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री सह शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने इस बाबत प्रस्ताव रखा है, जिसमें वाममोर्चा और कांग्र्रेस को शामिल किए जाने की बात कही गई है. इस बीच संसदीय राज्य मंत्री तापस राय ने सदन के अनुच्छेद 85 के तहत सांप्रदायिकता पर चर्चा के लिए एक मसौदा भी तैयार किया है. यह खसड़ा वामो और कांग्र्रेस को दी गई है, लेकिन दोनों ने इसके कुछ पहलुओं पर आपत्ति जाहिर की है.
उधर, भाजपा का कहना है कि जब खुद मुख्यमंत्री ने वामो-कांग्र्रेस को साथ आने का आह्वान किया था और दोनों ने उनसे किनारा कर लिया है तो ऐसे में इंतजार प्रस्ताव आने का है फिर आगे परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाया जायेगा.
सोमवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्र्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि धर्म के नाम पर अब तक किसी की हत्या होते नहीं देखी गई. वर्तमान में जो हो रहा है वह पहले नहीं हुआ. इस संबंध में हम सरकार के साथ हैं और सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए. वहीं, मन्नान के सूर में सूर मिलाते हुए माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी सर्वदलीय बैठक की तरफदारी की.
उधर, पार्थ चटर्जी ने कहा कि हम विपक्ष के प्रस्ताव को लेकर विधानसभा स्पीकर को सूचित करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारी विचारधारा बेसक अलग हो सकती है लेकिन बंगाल में धर्म के आधार पर लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश को कामयाब नहीं होने दिया जायेगा. पश्चिम बंगाल झारखंड अथवा उत्तर प्रदेश नहीं है, जो लोग पश्चिम बंगाल में धर्म के आधार पर बंटवारे की साजिश कर रहे हैं वे लोग कामयाब नहीं होंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले सप्ताह विधानसभा में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और माकपा को तृणमूल के साथ मिल कर लड़ने का आह्वान किया था और कहा था कि उन्हें भय की भाजपा कहीं संविधान ही न बदल दे.
सोमवार को राज्य विधानसभा में कांग्रेस, माकपा और तृणमूल के विधायकों ने एक सुर में सांप्रदायिक शक्ति के खिलाफ जमीनी तौर पर आंदोलन की बात कही है. दरअसल, राज्य भर में कथित सांप्रदायिक माहौल को लेकर विधानसभा में चर्चा हो रही थी. उस दौरान तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अजीब तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरत का माहौल बनता जा रहा है. 70 के दशक में पश्चिम बंगाल में नक्सल आंदोलन हुआ था. तब पूरे राज्य का माहौल हिंसक था. तब हम लोग छात्र थे, लेकिन तब भी राज्य भर में इस तरह का हिंसक माहौल नहीं था. असित ने कहा कि भाजपा राज्य भर में हिंसक माहौल बना रही है. इसके खिलाफ आंदोलन की जरूरत है.
इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अब्दुल मन्नान ने कहा कि पश्चिम बंगाल की अपनी अपनी संस्कृति है. अतीत में बंगाल के मनीषियों ने सर्वधर्म समभाव की बातें की है, लेकिन आज हालात बदतर बन गए हैं. राजनीतिक विचारधारा की वजह से लोगों की हत्याएं हो रही हैं. धर्म की वजह से लोगों को मारा-पीटा जा रहा है. राज्य भर में इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आने लगी हैं.
मुझे विश्वास है कि ऐसी परिस्थिति में राज्य में विपक्ष के सारे नेता एकजुट होकर काम करेंगे. सांप्रदायिक घटनाओं में राज्य सरकार को ठोस कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है. ऐसे समय में लोगों को भी एकजुट रहने की जरूरत है. हम लोग सरकार के साथ खड़ा रहेंगे. इसके बाद सदन में माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती खड़े हुए. उन्होंने कहा कि दिल्ली और झारखंड में मजहब की वजह से लोगों की पीट-पीटकर हत्या की गयी थी. अब पश्चिम बंगाल में भी इसकी छाया पड़ने लगी है. इसके खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा. उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले कैनिंग में मदरसा शिक्षक को मारपीट कर ट्रेन से उतार दिया गया. अतीत में ऐसा कभी नहीं होता था. ये शर्म की बात है.
