भाजपा के ‘योगदान मेले’ पर आरएसएस की कड़ी नजर

कोलकाता : लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश भाजपा में अन्य पार्टियों के नेताओं के शामिल होने की होड़ लग गयी है. भाजपा नेताओं ने दूसरी पार्टी के ने���ाओं को भाजपा में शामिल करने के लिए जगह-जगह ‘योगदान मेला’ का आयोजन कर रहे हैं. प्रदेश भाजपा कार्यालय में स्थायी रूप से योगदान मंच ही बना दिया […]

कोलकाता : लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश भाजपा में अन्य पार्टियों के नेताओं के शामिल होने की होड़ लग गयी है. भाजपा नेताओं ने दूसरी पार्टी के नेताओं को भाजपा में शामिल करने के लिए जगह-जगह ‘योगदान मेला’ का आयोजन कर रहे हैं. प्रदेश भाजपा कार्यालय में स्थायी रूप से योगदान मंच ही बना दिया गया है, लेकिन भाजपा में लोगों के शामिल होने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कड़ी नजर रखे हुए है.

हाल में सोशल साइट्स पर भाजपा के पुराने नेताओं ने ‘योगदान मेले’ के आयोजन को लेकर चिंता जतायी थी. आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार भाजपा एक राजनीतिक संगठन है और पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार की नीति के तहत कार्य कर रही है.
राज्य में 34 वर्षों तक वाममोर्चा का शासन था और पिछले साढ़े सात वर्षों से तृणमूल कांग्रेस का शासन है. राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति अभी तक प्रतिकूल रही थी, लेकिन अब राज्य की राजनीतिक परिस्थिति में परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है. स्वाभाविक है कि इससे लोगों के भाजपा में शामिल होने के प्रति उत्साह भी बढ़ा है.
दूसरी पार्टियों के लोग भाजपा में शामिल भी हो रहे हैं, क्योंकि बिना संगठन मजबूत किये सत्ता हासिल करना संभव नहीं है, लेकिन भाजपा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा वाली पार्टी है.
आशा करते हैं कि भाजपा में शामिल होनेवाले कार्यकर्ता भाजपा की विचाराधारा को भी अपना रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो भाजपा की विचारधारा में तारतम्य नहीं बैठा पा रहे हैं. वे खुद ही अलग-थलग पड़ जा रहे हैं. इनमें प्रमुख रूप से माकपा से भाजपा में शामिल हुए पूर्व मेदिनीपुर के नेता लक्ष्मण सेठ हैं. राजनीतिक हित के कारण वह ज्यादा दिनों तक भाजपा में नहीं रह पायें.
उसी तरह से बीरभूम के लाभपुर के विधायक मनीरुल इस्लाम भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन फिलहाल दरकिनार हैं. उन्हें पार्टी का कोई महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया है. वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि आरएसएस भाजपा में शामिल होनेवालों पर कड़ी नजर रखे हुए है और उसके अनुरूप कदम भी उठा रही है.
आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख बिप्लव राय का कहना है लेकिन आरएसएस ने कभी भी भाजपा की गतिविधियों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करती है. आरएसएएस सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करती है. राज्य में सामाजिक उत्थान के लिए आरएसएस लगातार काम कर रही है. पहले की तुलना में राज्य में आरएसएस का कार्य और विस्तार दोनों ही बढ़ा है.
हाल में सोशल साइट्स पर भाजपा के पुराने नेताओं ने ‘योगदान मेले’ के आयोजन को लेकर चिंता जतायी थी.
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार भाजपा एक राजनीतिक संगठन है और पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार की नीति के तहत कार्य कर रही है
राज्य में 34 वर्षों तक वाममोर्चा का शासन था और पिछले साढ़े सात वर्षों से तृणमूल कांग्रेस का शासन है. स्वाभाविक है कि इससे लोगों के भाजपा में शामिल होने के प्रति उत्साह भी बढ़ा है.

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