महानगर में प्याऊ का पानी बना जानलेवा, लोग पड़ रहे हैं बीमार

अब निगम की अनुमति से ही लगेगा प्याऊ कोलकाता : सोशल कॉरपोरेट रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) की नाम पर महानगर में बड़ी-बड़ी कंपनियों की ओर से प्याऊ लगवाये गये हैं. लेकिन उसके रख-रखाव की खबर तक नहीं ली जाती है. फिलटर की नियमित साफ-सफाई के अभाव में उसमें गंदगी जम जाती है. गंदगी के कारण पानी में […]

अब निगम की अनुमति से ही लगेगा प्याऊ

कोलकाता : सोशल कॉरपोरेट रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) की नाम पर महानगर में बड़ी-बड़ी कंपनियों की ओर से प्याऊ लगवाये गये हैं. लेकिन उसके रख-रखाव की खबर तक नहीं ली जाती है. फिलटर की नियमित साफ-सफाई के अभाव में उसमें गंदगी जम जाती है. गंदगी के कारण पानी में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और उस पानी को पीकर महानगर के लोग बीमार पड़ जाते हैं. अब प्याऊ लगाने से पहले अनिवार्य रूप से निगम की अनुमति लेनी होगी. ये बातें कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहीं.
वह शनिवार को कोलकाता नगर निगम के अधिवेशन में एक सवाल का जवाब दे रहे थे. मेयर ने कहा कि महानगर में कई जगहों पर ऐसे प्याऊ लगे हुए हैं. कई जगहों पर एमपी लैड फंड से भी प्याऊ को लगाये गये हैं. राहगीरों की सुविधा के लिए इन्हें लगा तो दिया जाता है, लेकिन प्याऊ के फिलटर के रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता है. ऐसे में लोगों को ठंडा पानी तो मिलता है, लेकिन यह पानी जहर के समान हो जाता है.
मेयर ने कहा कि स्थानीय पार्षदों की अनुमति से इन प्याऊ को लगा दिया जाता है. लेकिन अब प्याऊ लगानेवालीं कंपनियों को निगम के साथ समझौता करना होगा, ताकि कम से कम पांच वर्ष तक ठंडा पानी देनेवाली मशीन की देख-रेख हो और फिलटर की सफाई हो. उन्होंने कहा कि प्याऊ लगानेवालीं कंपनियों‍ को ही यह काम करना होगा. मेयर ने कहा प्याऊ में निगम ही जालापूर्ति करता है.
लेकिन प्याऊ के खराब होने या फिलटर की साफ-सफाई न होने के कारण लोग शुद्ध जल के नाम पर अशुद्ध जल पीते हैं. अब वार्ड स्तर पर निगम ऐसे वाटर एटीएम या प्याऊ की सर्वे करेगा. पुराने व खराब फिलटर वाले प्याऊ को तोड़ दिया जायेगा. वहीं, प्याऊ को चालू करने के लिए कंनियों को अविलंब निगम के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा, ताकि मेंटेनेंस हो सके.

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