स्कूलों में बच्चों को मुहैया कराया जायेगा लॉकर
कोलकाता : केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सर्कुलर में स्कूली बच्चों के लिए (कक्षा 1 व 2) बस्ते का वजन लगभग डेढ़ किलो रखने का एक निर्देश दिया गया था. वहीं कक्षा तीन के बच्चे के बस्ते का वजन 2-3 किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसमें मंत्रालय ने पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक के बच्चों के बस्ते का वजन भी तय कर दिया है.
इस फरमान के बाद पश्चिम बंगाल के कई निजी व सरकारी स्कूलों में बस्तों का बोझ कम करने के लिए लॉकर की व्यवस्था शुरू की जा रही है. हालांकि हेरीटेज, डीपीएस, मेगा सिटी, बिरला हाइ स्कूल व ला मार्टिनियर जैसे कई नामी स्कूलों में पहले ही इसकी सुविधा उपलब्ध है. अब महानगर में कई अन्य सीबीएसइ, आइसीएसइ व सरकारी स्कूलों में भी बच्चों के कंधों का बोझ कम करने के लिए लॉकर की व्यवस्था की जा रही है.
निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों का कहना है कि सरकार का यह प्रयास सराहनीय है, इससे बच्चों को काफी राहत मिलेगी. बस्तों के बोझ से कई बार बच्चे परेशान हो जाते हैं. बंगाल के न केवल निजी स्कूल बल्कि सरकारी स्कूलों में भी अब इस तरह की व्यवस्था की जायेगी. यह जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बस्तों का बोझ कम करने के लिए राज्य के सरकारी अनुदान प्राप्त लगभग 120 स्कूलों में नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक शीघ्र ही लॉकर की व्यवस्था की जायेगी. उनके कंधों को भारी बैग से मुक्त करने के बस्तों का वजन तय किया गया है.
नेशलन कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने भी यह निर्देश जारी किया था कि स्कूल के बस्ते का वजन बच्चे के वजन से 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए. सर्कुलर जारी होने के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी इस मामले में उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया था. प्रथम चरण में सीधे स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाये जा रहे स्कूलों जैसे हिंदू स्कूल, हेयर स्कूल, बैथुन स्कूल, सखावत मेमोरियल स्कूल, बालीगंज गवर्नमेंट में लॉकर लगाया जायेगा. दूसरे चरण में अन्य स्कूलों में यह सुविधा शुरू की जायेगी. इसके लिए 6 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है.
