विश्व के सबसे बेहतरीन अधिकारी को बदनाम करने की सीबीआइ रच रही साजिश
कोलकाता : कोलकाता पुलिस व पश्चिम बंगाल पुलिस के संयुक्त पहल पर हर साल संपन्न होने वाला संयुक्त अलंकार समारोह इस बार उत्तीर्ण में होनेवाला था, लेकिन ममता बनर्जी के धरना पर बैठ जाने के कारण कार्यक्रम को धरना स्थल के पास ही करना पड़ा. ममता के मंच के पास एक और मंच बनाया गया […]
कोलकाता : कोलकाता पुलिस व पश्चिम बंगाल पुलिस के संयुक्त पहल पर हर साल संपन्न होने वाला संयुक्त अलंकार समारोह इस बार उत्तीर्ण में होनेवाला था, लेकिन ममता बनर्जी के धरना पर बैठ जाने के कारण कार्यक्रम को धरना स्थल के पास ही करना पड़ा. ममता के मंच के पास एक और मंच बनाया गया था, जहां पर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार, डीजीपी वीरेंद्र, राज्य के सुरक्षा सलाहकार सुरजीत कर पुरकायस्थ व गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुल 189 पुलिस के जवानों को पुरस्कृत किया.
इस मौके पर पुलिस के जवानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह प्रतिकूल परिस्थितियों में पुलिस को काम करना पड़ता है. वह वाकई तारीफ के काबिल है, क्योंकि इनकी तत्परता के कारण ही पश्चिम बंगाल में एक करोड़ दुर्गापूजा कमेटियों के संचालन में कोई हंगामा नहीं होता.
ईद लोग शांतिपूर्ण ढंग से मनाते हैं और तो और इतना बड़ा गंगासागर मेला में पुलिस के सहयोग से एक दुर्घटना तक नहीं होती है, लेकिन कुछ लोगों को यहां की कानून व्यवस्था में खामी नजर आती है.
उनको अपने मुंह पर लिकोप्लास्ट लगा लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इतनी निष्ठा से काम करनेवाले पुलिस के जवानों को अगर कोई चोर कहे तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगी. राजीव कुमार का हवाला देते हुए कहा कि विश्व के सबसे बेहतरीन अधिकारी को बदनाम करने के लिए सीबीआइ उनके घर पहुंच गयी. उनके पास कोई सबूत नहीं था.
अगर सबूत है तो वह लोग पेश करें हम स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं.उन्होंने कहा, जब मुझे इसकी जानकारी मिली तो मैंने फौरन राजीव के घर जाने का निर्णय लिया. हालांकि सुरजीत कर पुरकायस्थ और राजीव कुमार उनको मना करते रहे. फिर भी वह आयी, जवानों के लिए धरने पर बैठी हैं, ताकि केंद्र की भाजपा सरकार को उखाड़ फेंका जाये.
उन्होंने कहा कि उनके धरने से कोई काम नहीं रुका है. वह जवानों के साथ हैं और रहेेंगी. उन्होंने कभी किसी से समझौता नहीं किया है और न करेंगी. अगर इसके लिए उनको मरना पड़ा तो वह तैयार हैं.
इस मौके पर विशेष साहस के लिए के अमरनाथ, सौम्यजीत राय, अभिजीत विश्वास, अमिताभ मल्लिक, अखिलेश चतुर्वेदी को मेडल दिया गया. इसके अलावा 10 को शौर्य पदक, 12 को निष्ठा पदक के अलावा 51 को प्रशंसा पदक और 80 को सेवा पदक दिया गया.