कोलकाता. केंद्र सरकार ने कोयला उत्पादन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया को उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश दिये हैं. कंपनी को कोयला मंत्रलय ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि अगर कंपनी पुनर्गठन नहीं चाहती है, तो उन्हें कोयला उत्पादन हर हाल में बढ़ाना होगा.
कहा गया है कि यदि वह पुनर्गठन नहीं चाहती है, तो अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाये. सूत्रों के मुताबिक बिजली व कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने सरकारी कंपनी से कहा है कि वह 31 दिसंबर तक कोयल के उत्पादन व उसकी गुणवत्ता में सुधार करे. मंत्री ने यह भी कहा कि कोयला क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी को अपना भंडार बढ़ाना चाहिए. कोयला मंत्रलय ने इससे पहले परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कोल इंडिया के पुनर्गठन की योजना बनायी थी.
कुल घरेलू कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है. कंपनी वर्ष 2013-14 में 48.2 करोड़ टन का उत्पादन लक्ष्य हासिल करने से चूक गयी और उसने सिर्फ 46.2 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया था. कंपनी की सात सहयोगी कंपनियों में इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (इसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) व साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसइसीएल) शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक गोयल ने कोल इंडिया से कहा कि बिजली कंपनियों को आपूर्ति किये जानेवाले कोयले में पत्थर या बोल्डर नहीं होने चाहिए और इसे कोयले की गुणवत्ता में कमी रोकने के लिए काम करना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक कोयले की गुणवत्ता में कमी का बिजली उत्पादन पर गंभीर असर होता है.
इस बीच मंत्री का मानना है कि बिजली उत्पादन कंपनियों को गुणवत्ता की जांच के लिए तृतीय पक्ष की नियुक्ति का अधिकार होना चाहिए. उन्होंने कोल इंडिया से यह भी कहा है कि वह इ-नीलामी के जरिये कोयला की बिक्री कम करे और यह कोयला बिजली संयंत्रों को उपलब्ध कराये. सूत्रों ने बताया कि कोल इंडिया को कोयले की ई-नीलामी की सीमा 5.7 करोड़ टन से घटाकर 2.5 करोड़ टन करने का निर्देश दिया गया है.
