बीए कमेटी से अनुपस्थित रहे कांग्रेस-वामो विधायक विधानसभा में लायेंगे अविश्वास प्रस्ताव

कोलकाता : राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्ववाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ कांग्रेस व वाममोर्चा ने संयुक्त रूप से विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है. इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी के नेतृत्व में बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस व वाममोर्चा के विधायक शामिल […]

कोलकाता : राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्ववाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ कांग्रेस व वाममोर्चा ने संयुक्त रूप से विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है. इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी के नेतृत्व में बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस व वाममोर्चा के विधायक शामिल हुए, लेकिन बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से अनुपस्थित रहे.
बुधवार को विधानसभा में सर्वदलीय बैठक के बाद विधानसभा परिसर में संवाददाता सम्मेलन को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान व माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने ये बातें कहीं. श्री मन्नान ने कहा कि पिछले सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन इसके लिए 14 दिनों के सत्र की अवधि की जरूरत होती है.
इस कारण अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सका. लेकिन इस सत्र के दौरान कांग्रेस व वाममोर्चा संयुक्त रूप में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लायेगा. उन्होंने कहा कि विधानसभा में विरोधी दल के विधायकों की बातें नहीं सुनी जाती हैं और न ही उन्हें बोलने का मौका दिया जाता है. विपक्षी दल के सदस्यों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जाता है और मुख्यमंत्री भी विधानसभा में अनुपस्थित रहती हैं.
माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सबसे कम समय के लिए विधानसभा का सत्र बुलाये जाने की परंपरा बन गयी है. देश में सबसे कम समय पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कार्यवाही होती है. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि कांग्रेस व वाममोर्चा के विधायक संयुक्त रूप से जंगलमहल का दौरा करेंगे.
दूसरी ओर, विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मनोज चक्रवर्ती ने कहा कि जंगलमहल में सबर जनजाति के सात लोगों की मौत हो गयी और राज्य सरकार विकास की बातें करती हैं. राज्य सरकारी कर्मचारियों के डीए का बकाया है और छठवां वेतन आयोग लागू नहीं किया जा रहा है.
राज्य पूरी तरह से कर्ज के बोझ में डूब गया है. विधानसभा सत्र के दौरान इन मुद्दों को उठाया जायेगा. यदि उन्हें अनुमति नहीं दी गयी, तो वे लोग प्रजातांत्रिक और संसदीय तरीके से इसका विरोध करेंगे.

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