कोलकाता : ब्रिज के नीचे से गुजरने से कतराने लगे हैं लोग

अन्य ब्रिजों की हालत पर विशेषज्ञों ने जतायी चिंता कोलकाता : विवेकानंद ओवर ब्रिज हादसे के बाद अब माझेर ब्रिज टूटने की घटना के बाद से ही विशेषज्ञाें ने महानगर के अन्य ब्रिजों की हालत पर चिंता जतायी है. केएमडीए तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने महानगर के अन्य ब्रिजों के रखरखाव के लिए […]

अन्य ब्रिजों की हालत पर विशेषज्ञों ने जतायी चिंता
कोलकाता : विवेकानंद ओवर ब्रिज हादसे के बाद अब माझेर ब्रिज टूटने की घटना के बाद से ही विशेषज्ञाें ने महानगर के अन्य ब्रिजों की हालत पर चिंता जतायी है. केएमडीए तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने महानगर के अन्य ब्रिजों के रखरखाव के लिए यादवपुर विश्वविद्यालय के साथ संपर्क किया है. विशेषज्ञों के अनुसार महानगर में ऐसे कई ब्रिज हैं, जिनका रखरखाव ठीक ढंग से नहीं हो रहा है. आम आदमी ही इनकी हालत देखकर अब इसके नीचे से गुजरने से कतराने लगे हैं. हाल ही में चिंगरीहाटा ब्रिज की हालत पर लोगों की नजर पड़ी थी, जिसके बाद इसका मरम्मत कार्य आरंभ किया गया. एक नजर ब्रिजों के इतिहास पर:
ढाकुरिया ब्रिज : दो किलोमीटर लंबे इस ब्रिज का निर्माण 1970 में किया गया, जिसकी सख्त मरम्मत की जरूरत है.
चेतला फ्लाईओवर : एक किलोमीटर लंबा यह सेतु भी काफी पुराना है. मुख्यमंंत्री ज्योति बसु ने 1998-99 में इसका उद्घाटन किया था. हालांकि अभी तक इसमें कोई शिकायत नहीं पायी गयी है.
बिजन सेतु : 1.5 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज को भी 70 के दशक में लोगों के लिए चालू किया गया था. उस समय इसका निर्माण कोलकाता इंप्रुवमेंट ट्रस्ट ने किया था.
कालीघाट ब्रिज : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निवास स्थान के समीप स्थित यह ब्रिज भी काफी महत्वपूर्ण है. एक किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे से आदिगंगा गुजरती है.
डेरेजियो ब्रिज या दुर्गापुर ब्रिज : 1990 में केएमडीए ने इसे तैयार किया था, जिसकी लंबाई डेढ किलोमीटर है.उल्टाडांगा फ्लाईओवर : जनवरी 2011 में 40 मीटर लंबे इस सेतु को तैयार किया गया था. इसकी मरम्मत का काम भी वर्ष 2014 में किया गया था.
गरियाहाट फ्लाईओवर : अप्रैल 2002 में निर्मित इस सेतु की लंबाई 570 मीटर है. इसे जापान बैंक के सहयोग से तैयार किया गया था. अभी तक इसमें किसी तरह की क्षति का अंदेशा नहीं है. परंतु विशेषज्ञों की मानें तो इस पर भी ध्यान रखने की जरुरत है.
बाघाजतीन ब्रिज : वर्ष 2008 में निर्मित इस सेतु की लंबाई करीब 2 किमी है. यह मुख्यत: माझेर हाट की भांति ही रेलवे ओवर ब्रिज की तरह है. यह कुछ दिन पहले ही गड्ढों की वजह से चर्चा में था. इसके रखरखाव पर खास ध्यान देने की जरुरत है.
चिंगरीहाटा फ्लाईआेवर : वर्ष 2005 में निर्मित इस ओवर ब्रिज में 2016 में गड्ढे की शिकायत के बाद हाल ही में इसका मरम्मत किया गया था. इस पर भी केएमडीए की नजर है.

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