कोलकाता : राष्ट्रपति की अनुमति न मिलने तक जलपाइगुड़ी सर्किट बेंच को लेकर अगला कदम नहीं उठाया जायेगा. कलकत्ता हाइकोर्ट प्रशासन ने केंद्र को यह स्पष्ट कर दिया है.
सोमवार को कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश जयमाल्य बागची व न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष केंद्र के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल कौशिक चंद ने इसकी जानकारी दी. जलपाइगुड़ी सर्किट बेंच को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में कई मामले हुए हैं. कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ के समक्ष अबतक इन मामलों की सुनवाई हो रही थी. मुख्य न्यायाधीश द्वारा मामलों को न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंडपीठ में सुनवाई के लिए भेजा गया है.
कौशिक चंद ने जनहित मामले की सुनवाई में यह कहा. याचिकाकर्ता के वकील आशीष सान्याल ने अदालत में कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं जिसमें कहा गया है कि राज्य प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री द्वारा सर्किट बेंच का उद्घाटन किया जायेगा. जो विषय पूरी तरह न्यायपालिका के अधीन है उसमें प्रशासन की भूमिका कैसे हो सकती है?
उनका यह भी कहना थआ कि सर्किट बेंच को लेकर राजनीति हो रही है जो उचित नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट का सर्किट बेंच जलपाइगुड़ी में जरूर हो सकता है लेकिन कोलकाता मे जो ट्राइब्यूनल काम कर रहे हैं उनकी शाखा भी जलपाइगुड़ी में होनी चाहिए.
इशकी वजह है कि कोलकाता के ट्राइब्यूनल की अपील का मामला कलकत्ता हाइकोर्ट में होता है. जलपाइगुड़ी में केवल सर्किट बेंच होता है तो वहां के लोग ट्राइब्यूनल में मामला करने के लिए कोलकाता ही पहुंचेंगे. खंडपीठ ने कहा कि मंगलवार को दोपहर एक बजे मामले की फिर से सुनवाई होगी.
