विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने असम में एनआरसी के प्रारूप पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह बहुत ही खतरनाक है. वे इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा देश में उकसावे की राजनीति कर रही है. उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास 1971 के पहले के प्रमाणपत्र हैं.
श्री मन्नान ने कहा कि पहले लोगों के पास कोई प्रमाणपत्र नहीं होते थे. मतदान पहचान पत्र का प्रचलन 90 के दशक में बढ़ा था. यदि सरकार इस बाबत विधानसभा में प्रस्ताव लाती है, तो कांग्रेस इसका समर्थन करेगी.
वाम विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि असम में वर्षों से रह रहे गैर असमियों लोगों को एनआरसी की सूची से बाहर कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा का रवैया सदा ही बंगाली विरोधी रहा है तथा इसके नाम पर समाज का ताना बाना बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
