कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन व शिक्षकों के बीच एडमिशन टेस्ट की नयी प्रक्रिया को लेकर मतभेद जारी है. जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से दाखिला प्रक्रिया में बड़े बदलाव किये जा रहे हैं. इसी को लेकर शिक्षकों में असंतोष है. समस्या के समाधान के लिए मंगलवार को एडमिशन कमेटी की बैठक हुई, लेकिन इस मुद्दे पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. इसको लेकर छात्रों में काफी आक्रोश है.
छात्रों का कहना है कि ह्यूमनिटीज के 6 विषयों में एडमिशन टेस्ट 11 जुलाई को होनेवाला है लेकिन अभी तक कुछ भी क्लीयर नहीं हुआ है कि प्रश्नपत्र कैसे आयेंगे व इसके मूल्यांकन में एक्सटर्नल विशेषज्ञों की क्या भूमिका रहेगी. छात्र इसको लेकर काफी असमंजस में हैं.जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जूटा) के प्रतिनिधियों का कहना है कि हमने वाइस चांसलर से दाखिले में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव वापस लेने के लिए कहा है, यह ठीक नहीं है.
इस मामले में कई विभागाध्यक्षों का कहना है कि अगर बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर दिया जायेगा तो वे पीछे हट जायेंगे. जेयू की दाखिला प्रक्रिया दशकों से दोषरहित रही है. इसमें कभी भी कोई दुर्नीति नहीं रही है. फिर जादवपुर यूनिवर्सिटी क्यों इसमें नया प्रयोग करना चाहती है. केवल कुछ विभागों में प्रवेश परीक्षा क्यों ली जाये.
उल्लेखनीय है कि वाइस चांसलर ने कहा था कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को दाखिला प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं है. इसी को लेकर शिक्षकों व प्रशासन में मतभेद है. फैकल्टी के साथ बातचीत करने के लिए बैठक आयोजित की गयी लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजे नहीं निकले हैं. शिक्षकों की मांग है कि एडमिशन टेस्ट के प्रश्नपत्रों का पैटर्न में कोई बदलाव न किया जाये. कुछ मल्टीपल च्वाइस कोश्चन शुरू किये जायेंगे. एडमिशन टेस्ट एक सप्ताह के लिए स्थगित किये गये हैं. 31 जुलाई तक दाखिला प्रक्रिया समाप्त करनी है लेकिन अभी तक प्रवेश टेस्ट को लेकर कोई क्लीयर फैसला नहीं आने से छात्र भी परेशान हैं.
