कालीगंज जैसी घटना से बंगाल में भय का माहौल बनाने में लगी है तृणमूल कांग्रेस

कहा कि कालीगंज की घटना के माध्यम से तृणमूल जनता को यह संदेश देना चाहती है कि उसके अलावा किसी अन्य पार्टी का समर्थन करने का क्या अंजाम हो सकता है.

माकपा नेताओं का आरोप, अगले वर्ष होनेवाले विस चुनाव से पहले हिंसा की राजनीति करने की साजिश ॉवामपंथियों का दावा : हिंसा के जरिये जनता में दिया जा रहा संदेश, जोड़ाफूल के अलावा किसी और को समर्थन का अंजाम जान लीजिए रानीगंज. नदिया के कालीगंज में हाल ही में हुए उपचुनाव के बाद हुए विजय उत्सव के दौरान बम फेंकने की घटना में नौ वर्षीय बच्ची तमन्ना की मौत के विरोध में, रानीगंज में माकपा ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें बड़ी संख्या में वामपंथी कैडर मौजूद थे. वामपंथी नेताओं सुप्रिय रॉय और दिब्येंदु मुखर्जी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में उपचुनाव हुए, जहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने जीत हासिल की, जबकि भाजपा के परिणाम उतने अच्छे नहीं रहे. हालांकि, कालीगंज जैसी हिंसक घटना कहीं और नहीं हुई, नेताओं ने आरोप लगाया कि अगले वर्ष बंगाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस यहां डर का माहौल बनाना चाहती है. कहा कि कालीगंज की घटना के माध्यम से तृणमूल जनता को यह संदेश देना चाहती है कि उसके अलावा किसी अन्य पार्टी का समर्थन करने का क्या अंजाम हो सकता है. सुप्रिय रॉय और दिब्येंदु मुखर्जी ने तमन्ना की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि एक मासूम बच्ची के माता-पिता के बड़े सपने थे, जिसे तृणमूल के ‘गुंडों’ ने चकनाचूर कर दिया. उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से तृणमूल की ‘वास्तविकता’ समझने की अपील करते हुए कहा कि यहां की सत्ताधारी पार्टी उनकी शुभचिंतक नहीं है. वामपंथी नेताओं ने यह भी कहा कि इस घटना के लिए तृणमूल को जिम्मेदार बताया जा रहा है और तृणमूल व भाजपा के बीच ‘सेटिंग’ की बातें भी सामने आ रही हैं. उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाये. नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने के बड़े-बड़े दावे किये थे, पर कालीगंज की घटना ने दावों को खोखला साबित कर दिया.

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By GANESH MAHTO

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