मकर संक्रांति पर जयदेव केंदुली मेले की तैयारियां लगभग पूरी

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा के विद बिहार अंचल और बीरभूम जिले के इलम बाजार स्थित जयदेव केंदुली के बीच अजय नदी के तट पर मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले ऐतिहासिक और पारंपरिक जयदेव मेले को लेकर अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.

पानागढ़.

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा के विद बिहार अंचल और बीरभूम जिले के इलम बाजार स्थित जयदेव केंदुली के बीच अजय नदी के तट पर मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले ऐतिहासिक और पारंपरिक जयदेव मेले को लेकर अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. बुधवार से मकर संक्रांति की शुरुआत के साथ ही जयदेव केंदुली मेला आरंभ हो रहा है. इस मेले में हर वर्ष की तरह इस बार भी आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा.

देश-विदेश से उमड़ती है भीड़

मकर संक्रांति के दिन अजय नदी किनारे स्थित केंदुली गांव में लगने वाले जयदेव मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद बाउल और लोक गायकों के अखाड़ों में रात भर चलने वाली गायकी लोगों को अपनी ओर खींचती है. बाउल गीतों और लोक संगीत की यह परंपरा जयदेव मेले की पहचान मानी जाती है.

केला और अखाड़े मेले का प्रमुख आकर्षण

पौष मास की ठंड के बीच जयदेव मेले में केले का विशेष महत्व है. मकर संक्रांति पर श्रद्धालु अजय नदी में स्नान के बाद राधा-गोविंद मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और फल-फूल के साथ केले का अर्पण करते हैं. प्रसाद के रूप में केले की कांदी लेकर श्रद्धालु अपने घर लौटते हैं. इस वर्ष मेले में स्टाल, दुकान और मनोरंजन के साधनों की संख्या बढ़ायी गयी है. साथ ही बाउल और लोक गायकों के अखाड़ों की संख्या भी पहले की तुलना में अधिक है.

प्रशासन और पुलिस सतर्क

मकर संक्रांति से ही जयदेव मेला शुरू होने के कारण जिला प्रशासन और जिला पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है. भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था और नदी घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. इलमबाजार पंचायत समिति अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर मेले का संचालन कर रही है. अजय नदी के प्रमुख घाटों को सजाया जा रहा है और पूर्णार्थियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी है.

कवि जयदेव की पावन भूमि

गीत गोविंद के रचयिता कवि जयदेव की यह भूमि ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. मान्यता है कि कवि जयदेव लखन सेन के दरबार के कवि थे. इस गांव में जयदेव द्वारा प्रतिष्ठित राधा-माधव की प्रतिमा, उनका साधना आसन और प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद हैं. 1683 में बर्दवान की महारानी ब्रज किशोरी ने यहां राधा विनोद मंदिर की स्थापना करायी थी. बाद के वर्षों में राधा रमण और राधा वल्लभ मंदिरों की प्रतिष्ठा के साथ केंदुली गांव एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हुआ.

अजय नदी में गंगा स्नान की परंपरा

किंवदंती के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन अजय नदी में गंगा स्नान की परंपरा कवि जयदेव से जुड़ी है. कहा जाता है कि देवी गंगा के दर्शन के बाद से अजय नदी को गंगा स्वरूप मानकर यहां स्नान और पूजा की परंपरा शुरू हुई. तभी से हर वर्ष मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालु अजय नदी के घाट पर स्नान के लिए पहुंचते हैं.

लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव

जयदेव मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव है. बंगाल के दूर-दराज इलाकों से हजारों बाउल, लोक और कीर्तनिया गायकों की मंडलियां यहां पहुंचती हैं. आपसी परिचय न होने के बावजूद गायकों और श्रोताओं के बीच ऐसा तारतम्य बनता है कि पूरा मेला भक्ति और संगीत में डूब जाता है. इस पावन पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >