‘मर जायेंगे मिट जायेंगे, पर रानीगंज को नहीं मिटने देंगे’

रानीगंज शहर को बचाने और कोल इंडिया की कथित साजिशों के खिलाफ ''रानीगंज बचाओ मंच'' ने हिल बस्ती मोड़ पर एक नुक्कड़ सभा आयोजित की.

रानीगंज.

रानीगंज शहर को बचाने और कोल इंडिया की कथित साजिशों के खिलाफ ””रानीगंज बचाओ मंच”” ने हिल बस्ती मोड़ पर एक नुक्कड़ सभा आयोजित की. सभा में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि रानीगंज एक ऐतिहासिक शहर है और इसे किसी भी कीमत पर उजाड़ने नहीं दिया जायेगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता रानीगंज नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष गौतम घटक ने की.

शहर को अपंग बनाने की साजिश : गौतम घटक

अपने संबोधन में गौतम घटक ने आरोप लगाया कि कोल इंडिया और केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से रानीगंज को ””आइसोलेटेड”” (अलग-थलग) कर रही है. ओसीपी (ओपन कास्ट माइनिंग) के माध्यम से शहर के चारों ओर खनन कर स्थिति भयावह बनाई जा रही है.उन्होंने कहा, आज हालत यह है कि पीने के पानी तक की कीमत वसूली जा रही है. यह शहर को खाली कराने की एक गहरी साजिश है.

जन-प्रतिनिधियों की उदासीनता पर आक्रोश

सभा में स्थानीय विधायक और सांसद की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए गए. सुभाष स्वदेश भावना के अध्यक्ष गोपाल आचार्य ने कहा कि शहर बचाने के लिए राजनीतिक सहयोग की जरूरत है, जो दुर्भाग्यवश नहीं मिल रहा है. वरिष्ठ पत्रकार विमल देव गुप्ता ने सीधा सवाल दागते हुए कहा, “जब 40 वर्षों में झरिया खाली नहीं कराया जा सका, तो रानीगंज को कैसे खाली किया जा सकता है? ताज्जुब की बात है कि स्थानीय विधायक तापस बंद्योपाध्याय इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में क्यों नहीं उठा रहे हैं. ” उन्होंने बताया कि विशिष्ट लोगों द्वारा लिखे गए पत्र का जवाब देने में विधायक को 6 महीने लग गये.

ज्वेलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष बलराम दे ने कहा कि “हम यहीं जन्मे हैं और यहीं मरेंगे.शहर खाली करने का सवाल ही पैदा नहीं होता.क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन की और से सलिल सिन्हा ने कहा कि “नकारात्मक प्रचार से शहर के व्यवसाय पर बुरा असर पड़ रहा है, हमें एकजुट होकर लड़ना होगा. अनुपम कुमार ने कहा कि उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों से समझाया कि कैसे योजनाबद्ध ढंग से शहर का विनाश किया जा रहा है.रानीगंज आईएमए के अध्यक्ष डॉ. चैताली बसु ने कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है, जन-जागरण शुरू हो चुका है. हम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे.

‘रानीगंज बचाओ मंच’ का आह्वान

रानीगंज सिटिजन्स फोरम, चैंबर ऑफ कॉमर्स और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से बने इस मंच ने अपील की है कि यह लड़ाई दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ””जीवन और जीविका”” बचाने की है. वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं.

कानूनी व जमीनी लड़ाई एक साथ

अधिवक्ता रामकृष्ण और मिहिर मंडल ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़कों पर जन-आंदोलन को और तेज किया जाएगा. इस अवसर पर विद्युत पांडे, चंडीचरण घोष, मोहन धीबर, समरेंदु मंडल सहित भारी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे.

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By AMIT KUMAR

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