पुरुलिया में 1.83 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम कटे

जिले से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार मतदाता-सूची से कुल एक लाख 83 हजार 387 वोटरों के नाम काटे गये हैं. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के समय जिले में कुल 21 लाख 66 हजार 894 मतदाता दर्ज थे.

पुरुलिया.

जिले से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार मतदाता-सूची से कुल एक लाख 83 हजार 387 वोटरों के नाम काटे गये हैं. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के समय जिले में कुल 21 लाख 66 हजार 894 मतदाता दर्ज थे. निर्वाचन आयोग के अभियान के तहत मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और डुप्लिकेट (नकली) नामों को सूची से हटाया गया है, जिसके बाद जिले में सियासी हलचल तेज हो गयी है.

काटे गये नामों का वर्गीकरण

आंकड़ों के मुताबिक मतदाता-सूची से 87 हजार 222 मृत वोटरों के नाम हटाये गये हैं. इसके अलावा 68 हजार 514 मतदाता ऐसे हैं, जो स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं. वहीं, पांच हजार 363 डुप्लिकेट या नकली नाम भी सूची से काटे गये हैं. प्रशासन का कहना है कि सूची को अद्यतन व पारदर्शी बनाने के लिए एसआइआर प्रक्रिया चलायी गयी है.

जिले की कुल नौ सीटों में से दो पर तृणमूल और बाकी पर भाजपा का कब्जा, क्षेत्रवार कटौती

बांदवान विधानसभा क्षेत्र में 17,029 नाम काटे गये, जहां 2021 में कुल वोटर 2,72,796 थे और यह सीट तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में है. बाघमुंडी में 21,516 नाम हटे, जहां 2021 में 2,37,261 वोटर थे और सीट तृणमूल कांग्रेस के पास है. बलरामपुर में 18,800 नाम कटे, 2021 में कुल वोटर 2,24,417 थे और यह सीट भाजपा के कब्जे में है. जयपुर में 19,527 नाम हटे, जहां 2021 में 2,36,633 वोटर दर्ज थे और सीट भाजपा के पास है. पुरुलिया विधानसभा क्षेत्र में 24,568 नाम काटे गये, 2021 में कुल वोटर 2,43,871 थे और यह सीट भाजपा के कब्जे में है. मानबाजार में 15,635 नाम हटे, जहां 2021 में 2,44,312 वोटर थे और सीट भाजपा के पास है. काशीपुर में 19,769 नाम काटे गये, 2021 में कुल वोटर 2,27,805 थे और यह सीट भाजपा के कब्जे में है. पारा में 23,712 नाम हटे, जहां 2021 में 2,31,576 वोटर थे और सीट भाजपा के पास है. रघुनाथपुर में 22,841 नाम काटे गये, 2021 में कुल वोटर 2,48,223 थे और यह सीट भाजपा के कब्जे में है.

चुनावी राजनीति में बढ़ी चर्चा

भाजपा के दबदबे वाले अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता के नामों की कटौती के अधिक आंकड़े सामने आने से चुनावी समीकरण पर असर पड़ने की चर्चा तेज हो गयी है. निर्वाचन आयोग के इस अभियान को लेकर जिले में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी व रणनीतिक हलचल तेज होती नजर आ रही है.

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Author: AMIT KUMAR

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