रानीगंज: ऑल बंगाल टीचर्स एसोसिएशन का सरकारी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन

रैली के बाद एक सम्मेलन भी आयोजित किया गया.

By GANESH MAHTO | January 12, 2026 1:19 AM

शिक्षकों की समस्याओं और स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर रैली एवं सम्मेलन आयोजित रानीगंज. पश्चिम बंगाल में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जर्जर स्थिति और शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर रविवार को ऑल बंगाल टीचर्स एसोसिएशन ने रानीगंज में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. संगठन की ओर से सीएमएसआइ भवन से एक विशाल रैली निकाली गयी, जो शिशु बागान, पीएन मालिया रोड और स्कूल मोड़ होते हुए वापस सीएमएसआइ भवन पर समाप्त हुई. रैली के बाद एक सम्मेलन भी आयोजित किया गया.

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के राज्य सचिव ध्रुव शेखर मंडल ने कहा कि आज राज्य में सरकारी शिक्षा का हाल गंभीर है. 8000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जबकि 3000 से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दे रही है.

शिक्षकों पर गैर-जरूरी कार्यों का बोझ

ध्रुव शेखर मंडल ने बताया कि सरकार शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय अन्य गैर-जरूरी कार्यों में उलझा रही है, जिसका प्रतिकूल असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सिर्फ पठन-पाठन तक सीमित रखा जाना चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे.

बढ़ता ड्रॉप-आउट रेट और बेरोजगारी

सम्मेलन में बताया गया कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट दर 4 प्रतिशत है, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह आंकड़ा बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच रहा है. इसका कारण अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा उठना और राज्य में रोजगार की कमी के चलते पलायन है.

मुख्य मांगें और रणनीति

संगठन ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों का बकाया डीए, स्कूलों में नियुक्ति और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर सरकार को झुकने के लिए मजबूर किया जायेगा. सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि मजबूत आंदोलन के जरिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बचाया जाए और शिक्षकों के सम्मान की रक्षा की जाये. कार्यक्रम में भारी संख्या में शिक्षक और संगठन के सदस्य मौजूद रहे और गगनभेदी नारों के साथ अपनी मांगों को बुलंद किया.

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