खदान में धंसान से दहशत, खतरे में रेल लाइन व रिहायशी क्षेत्र

धंसान की भयावहता: जानकारी के अनुसार, धंसाव से जमीन लगभग 70 से 80 फीट गहराई तक धंस चुकी है और अभी भी लगातार एक के बाद एक हिस्से धंसते जा रहे हैं.

रानीगंज. पश्चिम बर्दवान जिले की जेमेरी ग्राम पंचायत के अधीन ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (इसीएल) के श्रीपुर एरिया की एक पुरानी व बंद पड़ी चलबलपुर-बादकुठी कोलियरी के पास एक सील की गयी खदान में शुक्रवार सुबह करीब 5:00 बजे से व्यापक भू-धंसान हो रहा है. इससे चलबलपुर-बादकुठी गांव के लोगों में गहरी चिंता व डर बना हुआ है. धंसान की भयावहता: जानकारी के अनुसार, धंसाव से जमीन लगभग 70 से 80 फीट गहराई तक धंस चुकी है और अभी भी लगातार एक के बाद एक हिस्से धंसते जा रहे हैं. तेज आवाज़ के साथ हुए इस धंसाव ने स्थानीय लोगों में भारी दहशत फैला दी है.यह सील किया गया चाणक, जो कि कोयला खदान का प्रवेश द्वार होता है, अब लगातार नीचे धंस रहा है.

जान-माल का खतरा

इस धंसाव स्थल से मात्र 200 मीटर की दूरी पर मुख्य रेलवे लाइन गुजरती है, जिससे होकर सभी लंबी दूरी की ट्रेनें चलती हैं.इसके ठीक विपरीत दिशा में चलबलपुर-बादकुठी का घनी आबादी वाला गांव है, जहाँ 40 से अधिक परिवार लंबे समय से रह रहे हैं. लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर रहना पड़ रहा है, क्योंकि उनके मकान खनन क्षेत्र से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं.

स्थानीय लोगों के आरोप और इसीएल की कोताही ः स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईसीएल द्वारा खदानों को बंद करने के बाद उनमें उचित तरीके से बालू नहीं भरा गया, जिसके कारण बार-बार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं. उनका कहना है कि इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.

प्रशासन की उदासीनता

अब तक इस खतरनाक इलाके को घेरने या सुरक्षित करने के लिए किसी भी पक्ष द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.मुख्य रेलवे लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही धीमी गति से जारी है, लेकिन खतरा बना हुआ है. हालांकि ईसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया,एवं किसी तरह के बड़े खतरे की बात नहीं बताई.हालांकि इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और ईसीएल की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं

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Published by: Ganesh mahto

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