पांच साल से फरार बैंक का पूर्व चीफ मैनेजर कुल्टी से हुआ गिरफ्तार, भेजा गया जेल

जनवरी 2020 के बाद से फरार चल रहे इलाहाबाद बैंक आसनसोल शाखा के पूर्व मुख्य प्रबंधक सुभ्रजित साहा को आखिरकार सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया.

आसनसोल.

जनवरी 2020 के बाद से फरार चल रहे इलाहाबाद बैंक आसनसोल शाखा के पूर्व मुख्य प्रबंधक सुभ्रजित साहा को आखिरकार सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया. सुभ्रजित पर बैंक के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये गबन करने का आरोप है. जिसे लेकर वर्ष 2010 और वर्ष 2011 में बैंक प्रबंधन ने उसके खिलाफ सीबीआइ एसीबी में दो शिकायतें दर्ज करायी, जिसके आधार पर दो अलग-अलग मामले दर्ज हुए और सुभ्रजित को नामजद आरोपी बनाया गया.

वर्ष 2012 और वर्ष 2013 में सीबीआइ ने दोनों मामलों में अलग-अलग कुल पांच चार्जशीट जमा किया. मामले की ट्रायल शुरू हुई. जनवरी 2020 के बाद से सुभ्रजित अदालत में हाजिर नहीं हुआ और उसके मामले में ट्रायल की प्रक्रिया रूक गयी. अदालत ने अरेस्ट वारंट जारी किया. सीआरपीसी की धारा 82 की प्रक्रिया अपनायी गयी. इसके बावजूद भी वह अदालत में नहीं पहुंचा. कुल्टी इलाके से सीबीआइ ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां उसकी जमानत याचिका खारिज हो गयी और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

गौरतलब है कि इलाहाबाद बैंक आसनसोल शाखा में वर्ष 2010 में करोड़ों रुपये गबन का मामला काफी चर्चा में रहा था. इस मामले में शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक सुभ्रजित राय को नामजद आरोपी बनाया गया. जांच में और भी घोटाला प्रकाश में आने के बाद वर्ष 2011 में एक बैंक प्रबंधन की शिकायत पर सुभ्रजित को आरोपी बनाकर एक और मामला दर्ज हुआ. सीबीआइ ने मामले में वर्ष 2012 और वर्ष 2013 में अलग-अलग कुल पांच चार्जशीट जमा किया. अदालत ने चार्जशीट की समीक्षा के बाद ट्रायल शुरू करने की अनुमति दी. गवाही शुरू हुई. ट्रायल शुरू होते ही आरोपी जनवरी 2020 के बाद से अदालत में आना बंद कर दिया. आरोपी की उपस्थिति या उसके वकील की उपस्थिति के बगैर ट्रायल की प्रक्रिया नहीं चल सकती है. काफी तलाश के बाद भी आरोपी नहीं मिला, तब सीबीआइ की अपील पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया. इसके बाद भी आरोपी नहीं मिलने पर सीआरपीसी की धारा 82 के तहत प्रोसीडिंग हुई.

इस धारा का संबंध फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा से है. गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी आरोपी पकड़ा नहीं जाता और गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपता फिर रहा हो तो न्यायालय उसे एक लिखित उद्घोषणा जारी करता है. जिसमें आरोपी को अदालत में पेश होने का आदेश दिया जाता है. यह आदेश आरोपी के घर के सामने पढ़कर सुनाया जाता है और दरवाजे पर चिपका दिया जाता है. यह प्रक्रिया अपनाने के बाद भी सुभ्रजित अदालत में हाजिर नहीं हुआ. सीबीआइ ने उसे पकड़ लिया.

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By AMIT KUMAR

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