फैक्टरी के निरीक्षण को पहुंचे अधिकारियों को नहीं मिले श्रमिक, प्रबंधन का अधिकारी बोला : लंच के समय श्रमिक गये हैं खाना खाने
अफसरों पर आरोप, फैक्टरी प्रबंधन को बता कर प्लांट में पहुंची निरीक्षण टीम, हटा दिये गये थे सारे श्रमिकआरोपों का डीएलसी ने सिरे से किया खंडनआसनसोल. लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस से बचाव को लेकर गठित टास्क फोर्स टीम ने जिला में पहलीबार शुक्रवार को सालानपुर प्रखंड इलाके में पहुंची और यहां स्थित एक दर्जन से अधिक रैमिंगमास उद्योगों (क्वार्ज पत्थर डस्ट करने का कारखाना) में से एक का निरीक्षण किया. टीम की इस निरीक्षण को खानापूर्ति बताते हुए इलाके के एक एक्टिविस्ट और सिलिकोसिस लेकर आंदोलन कर रहे अमरनाथ महतो ने जिलाधिकारी को लिखित चिट्ठी भेजी. जिसमें उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों ने कारखाना प्रबंधन को इस निरीक्षण की सूचना पहले ही दे दी थी. जिसके कारण कारखाना प्रबंधन अपने श्रमिकों को पहले ही हटा दिया था. सिलिकोसिस के कारण अनेकों श्रमिकों की मौत हो चुकी है. प्रशासन का ऐसा रवैया नागरिकों के संवैधानिक अधिकार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. निरीक्षण के नाम पर अधिकारी सिर्फ कारखाना में गये और निकले. जिला श्रमायुक्त अमिय दास ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि किसी कारखाना प्रबंधन को आने की कोई सूचना नहीं दी गयी थी. जिलाधिकारी के अध्यक्षता में पहलीबार सिलिकोसिस को लेकर हुई वर्कशॉप में टास्क फोर्स टीम का गठन हुआ और जिला में पहलीबार टीम के सदस्यों ने उद्योगों के निरीक्षण का कार्य शुक्रवार को सालानपुर में किया. इस निरीक्षण में प्रदूषण के नियमों का सही तारीके से पालन किया जा रहा है या नहीं इसकी जांच की गयी. सिलिकोसिस को लेकर जागरूकता फैलाया गया. गैरतलब है कि जिलाधिकारी पोन्नमबालम.एस की पहल पर जिला में सिलिकोसिस बीमारी को लेकर पिछले दो माह में जो कार्य हुआ, वह अबतक नहीं हुआ था. सिलिकोसिस डायग्नोस्टिक बोर्ड की दो बैठकें हुई, अबतक जिला में सिर्फ एक ही मरीज चिन्हित हुआ था, बोर्ड को दो बैठकों में चार नए मरीज चिन्हित हुए. पांच को चिन्हित करने को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है. पहलीबार जिलाधिकारी की पहल पर सिलिकोसिस बीमारी को लेकर वर्कशॉप का आयोजन हुआ, जिला के सरकारी और निजी सभी प्रकार के उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे.
जिसमें सिलिकोसिस बीमारी को लेकर कारखाना प्रबंधन को जागरूक किया गया और इससे अपने श्रमिकों को बचाने के लिए सरकारी सभी दिशा निर्देशों को बताया गया. इसी वर्कशॉप में सिलिकोसिस को लेकर जिला टास्क फोर्स का गठन हुआ. इस टास्क फोर्स में श्रम विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस को शामिल किया गया. इस टास्क फोर्स को दायित्व दिया गया कि नियमित अंतराल पर टास्क फोर्स विभिन्न इलाकों में उद्योगों का निरीक्षण करेगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की अनुशंसा करेगी. पहले ही दिन टास्क फोर्स का निरीक्षण पर सवाल खड़ा हो गया.सालानपुर से शुरू हुई सिलिकोसिस की कहानी फैली पूरे जिले में
सालानपुर प्रखंड के अल्लाडी ग्राम पंचायत अंतर्गत रामडी गांव के निवासी अमरनाथ महतो ने पिछले कुछ वर्षों से सिलिकोसिस को लेकर मुहिम छेड़े हुए हैं. उन्होंने इसे लेकर कुक तीन शिकायत राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग में की है और तीनों शिकायत पर मामला शुरू हुआ है. उनके इस मुहिम को दबाने को लेकर विभिन्न स्तर से प्रयास हुआ. आखिर में वे प्रभात खबर को पूरी कहानी बतायी और प्रभात खबर ने उनके इस मुहिम को लेकर जनांदोलन खड़ा किया. जिसके परिणामस्वरूप पिछले ढ़ाई माह में सिलिकोसिस को लेकर जिला में एक अविश्वस्नीय बदलाव सभी की देखने को मिला. अबतक जिला में सिर्फ एक मरीज की पहचान हुई थी. दो माह में चार मरीजो की पहचान हो गयी. जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद अधिकारियों का ढुलमूल रवैया काफी लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है. जिसका आरोप लगाते हुए श्री महतो ने जिलाधिकारी को शिकायत की.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
