इसीएल न्यू केंदा कोलियरी में गैस रिसाव से कई बच्चे बीमार

इसीएल के केंदा एरिया के अधीन न्यू केंदा कोलियरी के शालडांगा मंडलपाड़ा क्षेत्र में बीती रात तब अफरा-तफरी मच गयी, जब पास ही संचालित ओसीपी (ओपन कास्ट प्रोजेक्ट) क्षेत्र से अचानक तेज व रहस्यमय दुर्गंध फैलने लगी.

जामुड़िया.

इसीएल के केंदा एरिया के अधीन न्यू केंदा कोलियरी के शालडांगा मंडलपाड़ा क्षेत्र में बीती रात तब अफरा-तफरी मच गयी, जब पास ही संचालित ओसीपी (ओपन कास्ट प्रोजेक्ट) क्षेत्र से अचानक तेज व रहस्यमय दुर्गंध फैलने लगी. इस जहरीली गैस के प्रभाव से कई बच्चों व महिलाओं की तबीयत बिगड़ गयी, जिसके बाद इसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया.

सांस लेने में कष्ट व उल्टियां, अस्पताल ले जाये गये बच्चे

स्थानीय अमरजीत कुमार मंडल ने बताया कि बीते शाम करीब 7:30 बजे अचानक हवा में दमघोंटू दुर्गंध फैल गई. इसके तुरंत बाद लोगों को सिरदर्द, चक्कर और उल्टियाँ होने लगीं.गैस की चपेट में आने से कृष मंडल (14) और राहुल मंडल (10) नामक दो बच्चों की हालत अधिक बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल ईसीएल के छोरा क्षेत्रीय अस्पताल ले जाया गया.प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है, लेकिन क्षेत्र में अभी भी दहशत का माहौल है.

पुनर्वास में देर पर प्रबंधन को घेरा

घटना की सूचना मिलते ही न्यू केंदा के सेफ्टी ऑफिसर हरियार प्रमाणिक, मैनेजर संजय मंडल, एजेंट प्रदीप विश्वास और केंदा फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुँची. ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मंडल पाड़ा के नीचे भूमिगत आग की जानकारी प्रबंधन को पहले से है. स्थानीय अभिजीत कुमार मंडल ने बताया कि इसीएल ने सर्वे कर लिया है और उन्हें पता है कि यहाँ रहना असुरक्षित है, फिर भी 26 परिवारों के पुनर्वास में जानबूझ कर विलंब किया जा रहा है. यह लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है.

1994 से जमीन के नीचे धधक रही आग : इसीएल

इस गंभीर मामले पर ईसीएल के डायरेक्टर टेक्निकल (ऑपरेशन) नीलाद्री राय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा की वर्ष 1994 में न्यू केंदा कोलियरी में लगी आग आज भी जमीन के नीचे धधक रही है, जिससे समय-समय पर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का रिसाव होता है. इसी आग को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में ओसीपी शुरू की गई है. न्यू केंदा के प्रभावित लोगों को एक साथ पुनर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पहचान पत्र वितरित किए जा रहे हैं.

बड़ी अनहोनी की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी ईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी। वर्तमान में मंडल पाड़ा के निवासी डर के साये में जीने को मजबूर.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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