कल ब्लैक डे मनायेंगे श्रमिक संगठनों के सदस्य, काला बैज लगाकर करेंगे आंदोलन

देशभर में श्रमिक संगठनों के विरोध के बावजूद सरकार ने 21 नवम्बर से चार श्रम कोड कानून को लागू कर दिया. जिसका पूरे देश में विरोध शुरू हुआ है.

आसनसोल.

देशभर में श्रमिक संगठनों के विरोध के बावजूद सरकार ने 21 नवम्बर से चार श्रम कोड कानून को लागू कर दिया. जिसका पूरे देश में विरोध शुरू हुआ है. 26 नवम्बर को इसके खिलाफ श्रमिक संगठनों ने ”ब्लैक डे” मनाने और जबतक इस श्रम कोड कानून को वापस नहीं लिया जाता, तबतक लगातार आंदोलन की रणनीति को लेकर इसीएल जॉइंट एक्शन कमेटी (जैक) के नेताओं की बैठक सोमवार को आसनसोल चेलीडांगा इलाके में स्थित एटक से संबद्ध कोलियरी मजदूर सभा (सीएमएस) के मुख्यालय में हुई. जिसमें सीएमएस के महासचिव गुरुदास चक्रवर्ती, सीटू से संबद्ध भारतीय कोलियरी मजदूर सभा (सीएमएसआइ) के महासचिव मनोज दत्ता, इंटक से संबद्ध कोलियरी मजदूर यूनियन (सीएमयू) के महासचिव चंडी बनर्जी, टीयूसीसी से संबद्ध पश्चिम बंगाल कोलियरी मजदूर यूनियन के महासचिव भवानी आचार्या, यूटीयूसी के संबद्ध पश्चिम बंगाल खान मजदूर सभा के महासचिव माधव बनर्जी, एचएमएस के संबद्ध कोलियरी मजदूर कांग्रेस (सीएमयू) के संयुक्त महासचिव प्रफुल्ल चटर्जी के साथ यूनियनों के अन्य नेता उपस्थित थे.

सीएमएस के महासचिव श्री चक्रवर्ती ने बताया कि पूरे देशभर में श्रमिक संगठनों के लगातार विरोध के बावजूद सरकार ने चार श्रम कोड कानून लागू कर दिया. यह कानून पूरी तरह से श्रमिक विरोधी और कॉरपोरेट घरानों के हित में है. इस कानून के श्रमिकों का मिनिमम वेज, काम का समय मालिक तय करेंगे. यूनियनों के मीटिंग, रैली पर पूरी तरह रोक लग जायेगी. 300 से कम श्रमिक वाले उद्योग में यूनियन बनाने का अधिकार नहीं होगा.

नियमित स्थायी कर्मचारियों की जगह फिक्स्ड टर्म रोजगार बढ़ने से नौकरी की स्थिरता कम होगी. ले-ऑफ, छंटनी और क्लोजर की शर्तें नियोक्ताओं के लिए आसान होगी. श्रमिकों के मूल अधिकारों और सुरक्षा में कटौती होगी. निरीक्षण व्यवस्था कमजोर होगा, जिससे श्रम कानून का पालन नहीं होगा. यह कानून पूरी तरह से श्रमिक विरोधी है. मजदूर अधिकारों की रक्षा को लेकर इसके विरोध में 26 नवम्बर को ब्लैक डे मनाया जाएगा. जिसके तहत पूरे इसीएल के श्रमिक इस दिन काला बैज पहनेंगे और अपने-अपने कोलियरी व एरिया में गेट मीटिंग करके विरोध जताएंगे. यह कार्यक्रम पूरे देशभर में सभी सेक्टर के श्रमिक पालन करेंगे. सरकार यदि इसके बावजूद भी श्रमिकों की मांगों को नहीं मानती है तो श्रम कोड कानून वापस लेने तक लगातार आंदोलन की रणनीति तैयार होगी. जिसपर भी यूनियनों की आपसी बैठक में सहमति बनी है.

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By Amit kumar

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