बीरभूम में प्रशासन हुआ लाचार, लाख प्रयासों के बाद भी नहीं बंद हो रहा बालू का अवैध कारोबार

बीरभूम में राजनीतिक दौरे के एक दिन बाद ही बालू से लदे ट्रक के खुलेआम गुजरने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. बरसात के मौसम में खनन और परिवहन के नियमों को ताक पर रखकर यह अवैध कारोबार जारी है. ट्रक चालक सवालों का जवाब नहीं दे सका और न ही कोई वैध दस्तावेज पेश कर पाया.

बोलपुर से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

बीरभूम में राजनीतिक दौरे के ठीक एक दिन बाद सुबह-सुबह बालू से लदे एक ट्रक के गुजरने का मामला सामने आया है. बरसात के मौसम में बालू खनन और परिवहन को लेकर सरकारी नियम लागू होने के बावजूद खुलेआम बालू से भरा ट्रक सड़कों पर दिखाई दे रहा है. प्रशासन इस बालू माफियाओं के आगे लाचार दिख रहा है. बरसात के मौसम में सरकारी नियमों के अनुसार नदियों से बालू का खनन, उठाव और परिवहन के लिए लोडिंग पर रोक रहती है.

चालक के पास नहीं थे सवालों के उत्तर

बताया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी के बीरभूम दौरे के एक दिन बाद सुबह बोलपुर के रास्ते से बालू से लदा एक ट्रक गुजर रहा था. ट्रक चालक से जब पूछा गया कि बालू कहां से आ रहा है, तो उसने खयराशोल बताया. लेकिन जब उससे बालू उठाने की जगह और संबंधित कागजात के बारे में सवाल किया गया, तो वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका और वहां से निकल गया.

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कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया

पहले से भंडारित बालू को प्रशासन की अनुमति और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही बेचा जा सकता है, लेकिन इस ट्रक चालक के पास बालू से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिखा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह बालू कहां से आया? किस नदी या इलाके से उठाया गया? और बिना दस्तावेज के ट्रक बोलपुर की सड़कों तक कैसे पहुंच गया? हैरानी की बात यह है कि पूरा मामला रात के अंधेरे का नहीं, बल्कि सुबह की खुली रोशनी में सामने आया.

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लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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