पाइकपाड़ा हत्याकांड में चार दोषियों को उम्रकैद

शनिवार को जिले की सिउड़ी जिला अदालत ने नाजायज संबंध के चलते एक युवक की हत्या के वर्ष 2019 के मामले में एक ही परिवार की तीन महिलाओं समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी.

बीरभूम.

शनिवार को जिले की सिउड़ी जिला अदालत ने नाजायज संबंध के चलते एक युवक की हत्या के वर्ष 2019 के मामले में एक ही परिवार की तीन महिलाओं समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक को अतिरिक्त दो माह की सजा जेल में काटनी होगी. यह मामला तीन अगस्त 2019 को पाइकपाड़ा में घटित हुआ था, जिसने उस समय पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था.

निकाह से पहले बना नाजायज संबंध, रची गयी साजिश

अदालत में सामने आये तथ्यों के अनुसार शमसुद्दीन शेख का निकाह पाइकपाड़ा की एक युवती से तय हुआ था. निकाह से पहले उसका अपने होने वाले ससुराल में आना-जाना बढ़ गया. युवक होनेवाली दुल्हन की दूसरी बहन के साथ अवैध संबंध में पड़ गया. जब इस संबंध की जानकारी होनेवाली दुल्हन और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को हुई, तो इसे परिवार की बदनामी से जोड़ कर देखा गया. अभियोजन-पक्ष के अनुसार इसी कारण सभी ने मिल कर शमसुद्दीन शेख को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली. युवक को पहले नींद की दवा दी गयी और फिर चाकू से गोद कर उसकी नृशंस हत्या कर दी गयी. फिर शव को सुनसान स्थान पर फेंक दिया गया, ताकि घटना छिपायी जा सके.

जांच, गिरफ्तारी और अदालत का निर्णय

घटना के उजागर होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. बाद में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट जमा की. मामले पर लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए केस से बरी कर दिया, जबकि बेली बीबी, तसलीमा बीबी, झुंपा खातून और लालन शेख को गुनहगार ठहराया.

मिलते-जुलते मामलों की पृष्ठभूमि

बीते कुछ वर्षों में बीरभूम और आसपास के जिलों में अवैध संबंधों को लेकर हिंसक घटनाएं सामने आती रही हैं. पूर्व में भी पारिवारिक सम्मान और सामाजिक दबाव के नाम पर कत्ल जैसे संगीन जुर्म दर्ज हुए हैं. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा समाज को साफ संदेश देती है कि निजी संबंधों के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत का यह फैसला उसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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Author: AMIT KUMAR

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