बर्नपुर : स्टील ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले आठ प्रतिशत वृद्धि के साथ, किसी भी वित्तीय वर्ष के लिए अब तक का सर्वाधिक विक्र य निष्पादन दर्ज किया.
कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में 131.43 लाख टन इस्पात का विक्र य किया है. कंपनी ने मार्च 2017 के माह के लिए भी अब तक का सर्वाधिक 15.75 लाख टन का विक्र य किया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 21 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन के क्षेत्न में भी कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2015-16 के मुकाबले वित्तीय वर्ष 2016-17 में विक्र य इस्पात के उत्पादन में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है.
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2016-17 में तकनीकी आर्थिक मानकों में पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले कोक रेट और ब्लास्ट फर्नेस उत्पादकता छह प्रतिशत बेहतर हुई है. सेल प्रबंधन ने लगातार उत्पादन बढ़ाने और नयी विप्पणन रणनीति को अपनाने पर विशेष बल दिया, जिसके परिणाम अब आने शुरू हो चुके हैं. कंपनी के निर्यात की दिशा में बढ़ते हुए कदम से इस अवधि के दौरान तीनगुना निर्यात हुआ है, जो अब तक का निर्यात में सर्वाधिक योगदान है. सेल घरेलू इस्पात बाजार की विशिष्ट रूप से निर्मित उत्पादों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए और अधिक मूल्यवर्धित उत्पादों को बाज़ार में लाने के लिए तैयारी कर रहा है.
सेल इस्पात से बनी है जम्मू-कश्मीर सुरंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित भारत की सबसे लंबी सड़क-सुरंग को देश को समर्पित किया. इस सुरंग से जम्मू और श्रीनगर के बीच की यात्ना पहले से दो घंटे कम समय में पूरी की जा सकेगी. ऐसा इस सुरंग के दो अंतिम बिन्दु क्र मश: चेनानी और नशरी के बीच की वास्तविक 41 किलोमीटर दूरी के सुरंग के रास्ते घटकर 10.9 किलोमीटर रह जाने से संभव हुआ है.
सेल ने देश की बुनियादी संरचना निर्माण अपनी भागीदारी को लगातार जारी रखा है. इसी क्र म में सेल ने भारत के सबसे बड़ी सडक-सुरंग की इस प्रतिष्ठित परियोजना के लिए इसके ठेकेदार मेसर्स आइएल और एफएस तथा चेनानी-नशरी के लिए इसके सहायक ठेकेदारों को पांच हजार टन से अधिक टाइम ग्रेड टीएमटी रिबार्स की सप्लाइ की है.
इस सुरंग को भारत के बाजी मार लेने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है. इस सुरंग के लिए इस्पात की सप्लाइ सेल द्वारा सीधे और अपने डीलर्स दोनों माध्यमों के जरिये की गई है. हाल ही में सेल स्टील का इस्तेमाल इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण में भी किया गया था. इसके अलावा सेल इस्पात का उपयोग राष्ट्रीय महत्व की विभिन्न परियोजनाओं के निर्माण में भी किया गया है.
