बांग्ला के विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के गीतों में रिसर्च की संभावनाओं के मुद्दे पर केएनयू में आयोजित कार्यशाला में कई विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे. सबने इस संगीत को प्रासंगिक बताते हुए दावा किया कि इसमें रिसर्च पूरे विश्व में हो रहा है.
आसनसोल. काजी नजरूल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में नजरूल सेंटर फॉर सोशल एंड कल्चरल स्टडीज ने एक दिवसीय कार्यशाला ‘नजरूल संगीत में अनुसंधान के अवसरों की खोज’ विषय पर आयोजित की. इसका उघाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ साधन कुमार चक्रवर्ती ने दीप प्रज्जवलित कर किया.
अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत कॉमर्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुशांत मित्र ने किया. अवसर पर ढाका विश्वविद्यालय (बांग्लादेश) के संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मोहसीना खानम, नजरूल अकेडमी (कोलकाता) के सदस्य बंधन सेनगुप्ता, विश्वभारती विश्वविद्यालय के हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विभागाध्यक्ष प्रो. सब्यसाची सारकल, रविंद्र भारती विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की डॉ नुपूर गांगूली, केएनयू के बंगला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मोनालिसा दास, रविंद्र भारती विश्वविद्यालय के ख्यातिप्राप्त तबला वादक एवं शिक्षक दिलीप मुखर्जी, नजरूल संगीत एवं साहित्य के गंवेषक ग्यासुद्दीन दलाल एवं दिलीप चटर्जी, डॉ चैताली दत्ता, नजरूल अकेडमी के संरक्षक काजी मोजाहर हूसैन, कवि काजी नजरूल इस्लाम के भतीजे काजी रेजाउल करीम आदि उपस्थित थे.
कार्यशाला में आसनसोल, बर्दवान, कोलकाता के आमंत्रित नजरूल ग्¨वेषकों ने नजरूल संगीत पर अपने वक्तव्य रखे. नजरूल गीतों पर गहन शोध कर रहे बांग्लादेश के नजरूल गंवेषक लीना तापसी खान ने कवि काजी नजरूल इस्लाम के गीतों को प्रस्तुत किया और कवि नजरूल पर लिखी अपनी चार पुस्तकें नजरूल अकेडमी के संरक्षक को भेंट की. सुश्री तापसी खान ने विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के जीवन एवं संघर्षो के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि नजरूल ने अपने गीतों में शोषित, पीड़ित नारी की व्यथा कथा का चित्रण किया है. नारियों को समर्पित गीतों में नजरूल ने नारी जागरूकता के कई ज्वलंत मुददों को प्रमुखता से उठाया है.
