समीक्षा. इसीएल के कॉरपोरेट सुरक्षा बोर्ड की बैठक में कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा
सांकतोड़िया : इसीएल कॉरपोरेट सुरक्षा बोर्ड की बैठक इसीएल के तकनीकी निदेशक (ऑपरेशन) बीएन शुक्ला की अध्यक्षता में इसीएल मुख्यालय प्रशासनिक भवन के सम्मेलन कक्ष में सोमवार को हुयी.
बैठक में निदेशक (वित्त) एएम मराठे, तकनीकी निदेशक (योजना व परियोजना) अजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (सुरक्षा), विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधक, यूनियन प्रतिनिधियों में एचएमएस के देवनाथ यादव, यूटीयूसी के जीतेन मंडल, सीटू के विनोद सिंह, एटक के कल्याण बनर्जी, बीएमएस के धनंजय पांडे आदि शामिल थे.
बैठक में राजमहल परियोजना की लालमटिया खदान दुर्घटना में मृत 23 ठेका श्रमिकों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया एवं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी. तकनीकी निदेशक (ऑपरेशन) श्री शुक्ला ने कहा कि राजमहल परियोजना की ललमटिया खदान में हुयी खान दुर्घटना हाल के वर्षो की सबसे बड़ी दुर्घटना है. इससे सभी को सीख लेनी चाहिए ताकि आगे इस प्रकार की दुर्घटना न हो. उन्होंने कहा कि अंतर्मन से कार्य नहीं करने पर ऐसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. इसमें कमी लाने के लिए सभी को इच्छाशक्ति से काम करना होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि दुसरी कंपनियों की खदानों का निरीक्षण करके सुरक्षा से जुड़ी उनकी अच्छी चीजों को इस कंपनी में लागू किया जा सकता है. सोच में कार्य संस्कृति का समावेश होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कंपनी का भविष्य उसकी कार्य योजना पर निर्भर करता है. उन्होंने अपना विजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि एक बेंच मार्क निर्धारित करना चाहिए ताकि अपेक्षित सुधार हो सके. कंपनी के वर्टिकल विस्तार पर कार्य करना चाहिए. इससे पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं का निराकरण संभव हो सकेगा. उन्होंने कहा कि उत्तरादायित्व का बोध उपर से नीचे तक हो. किसी भी कड़ी के टूटने पर निर्णय लागू नहीं हो पाता है. इच्छाशक्ति से काम करें तो कम होंगे हादसे.
इधर सुरक्षा बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि कंपनी मुख्यालय स्तर पर जो भी निर्णय प्रबंधन द्वारा लिये जाते हैं, उसे कोलियरी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए. ताकि श्रमिकों में सुरक्षा के प्रति जागरुकता बढ़े. उन्होंने सुझाव दिया कि कांट्रेक्टर श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था हो ताकि वो सही रुप से काम कर सके. सोदपुर एरिया की चिनाकुड़ी माइन्स संख्या एक पर भी चर्चा की गयी. सदस्य धनंजय पांडे एवं देवनाथ यादव ने कहा कि चिनाकुड़ी माईन संख्या एक धरोहर के रुप में है. उसका अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है. अभी भी 72 मिलियन टन कोयला मौजूद है. प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि इसे किसी भी कीमत में बंद नहीं होने दिया जायेगा. नई तकनीक द्वारा उत्पादन किये जाने के प्रयास जारी है.
