कोयले के अभाव में एनटीपीसी की तीन यूनिटें हो चुकी हैं बंद
डेढ़ माह बाद ललमटिया खदान से उत्पादन संभव, रेस्क्यू जारी
सांकतोड़िया. इसीएल के तकनीकी निदेशक (ऑपरेशन) बीएन शुक्ला ने कहा कि राजमहल परियोजना में उत्पादन ठप है परंतु कोयले का डिस्पैच शुरु हो गया है. वहां आठ लाख टन कोयला स्टॉक है.
उन्होंने कहा कि दस दिन बाद कोयला का डिस्पैच शुरु हुआ है. वैसे सुरक्षित किनारे से उत्पादन की तैयारी भी शुरु हो गयी है. सनद रहे कि खान हादसे के बाद कोयला सप्लाइ प्रभावित होने से एनटीपीसी की कहलगांव थर्मल की दो यूनिटें एवं फरक्का थर्मल की एक यूनिट बंद हो गयी थी.
श्री शुक्ला ने कहा कि दोनो पावर प्लांटों को राजमहल परियोजना से 20 हजार टन कोयला रविवार को एवं 11 हजार टन कोयला शनिवार को भेजा गया है. डिस्पैच सुचारु रुप से नहीं हो रहा है. बीच बीच मे वहां के ग्रामीण बाधा उत्पन्न कर रहे है. 18 श्रमिकों के शव निकाले जा चुके हैं. संभवत: पांच श्रमिक मलवे में हैं. उन्हें भी निकालने का काम किया जा रहा है.
रेस्क्यू की टीम लगी हुयी है. स्लोप मॉनिटरिंग सिस्टम लगायी गयी है. ओबी धंसने की पूर्व सूचना मिल जायेगी. उन्होंने कहा कि कंपनी में आउटसोर्सिग कंपनी कोयले का उत्पादन 60 प्रतिशत कर रही है. खान सुरक्षा महानिदेशालय खदानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है. जहां भी सुरक्षा संबंधी कोई त्रुटि है तो निदेशालय की नजर में इसे ठीक करना कोल कंपनी की जिम्मेदारी है. वैसे ओपेन कास्ट की सुरक्षा को लेकर गाइडलाईन जारी किए गए है. उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को 20.44 लाख रुपये मिलेगा.
जिसमें पांच लाख इसीएल, पांच लाख महालक्ष्मी कंपनी, दो लाख झारखंड सरकार तथा 8.44 लाख वर्क कंप्नशेंसन शामिल है. इसके भुगतान के लिए टीम गठित की गयी है. उन्होंने कहा कि राजमहल परियोजना से उत्पादन चालू करने में डेढ़ महीना लग जायेगा. अब कंपनी अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पायेगी. जिस रफ्तार से काम चल रहा था कि चालू वित्त वर्ष में कंपनी लक्ष्य से एक मिलियन टन ज्यादा उत्पादन करती.
