प्रशासन ने सात लोगों को किया गिरफ्तार
42 मुर्गे और नकद रुपये किये जब्त
ग्रामीणों ने बताया इसे अपनी परंपरा
बालूरघाट. ठंड के इस मौसम में गांव-गांव में पारपंरिक मुर्गा लड़ाई का खेल जमने लगा है. लेकिन अब यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जुआ का अड्डा बन गया है. प्रशासन ने भी इस अवैध जुआ को बंद कराने के लिए कमर कस लिया है. इसी बीच 42 मुर्गे व नकद रुपये जब्त किये गये हैं.
साथ ही सात लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. रविवार को जिला विशेष अदालत में बालूरघाट थाने की पुलिस ने इन सातों आरोपियों को पेश किया. शनिवार की रात सभी आरोपियों को बालूरघाट थाने की पुलिस ने चिंगिसपुर ग्राम पंचायत के गोपालपुर इलाके के मैदान में आयोजित मुर्गा लड़ाई उत्सव प्रांगण से गिरफ्तार किया. मुर्गा लड़ाई उत्सव में उपस्थित लोगों ने पुलिस के इस अभियान को गलत बताया. ग्रामवासियों का कहना है कि उत्सव को जुआ का नाम देकर प्रशासन की ओर परेशान किया जा रहा है.
दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालूरघाट व हिली ब्लॉक के गोपालपुर, मानिको, कुआवन, मालंगा व अन्य गांवों में मुर्गा लड़ाई का उत्सव पुराने रीति-रिवाज मानकर आज भी आयोजित होता है. इस उत्सव के लिए प्रशिक्षित मुर्गे और मुर्गा लड़ानेवाले विशेषज्ञ पहुंचते हैं. करीब तीन महीने पहले से ही मुर्गे को प्रशिक्षित किया जाता है.
लड़ाई के समय मुर्गे के पैर में धारदार छुरी बांधकर उसे मैदान में छोड़ दिया जाता है. इसे देखने के लिए ग्रामवासियों का उत्साह भी चरम पर होता है. ग्रामवासियों का कहना है कि मुर्गा लड़ाई का खेल उनके पूर्वजों के समय से चलता आ रहा है. लेकिन पहली बार पुलिस ने इस उत्सव में अभियान
चलाकर सात लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं बालूरघाट थाना प्रभारी संजय घोष ने बताया कि मुर्गा लड़ाई के उत्सव में प्रत्येक खेल में रुपये दावं पर लगाये जाते हैं. जुआ खेलते हुए रंगे हाथों सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. विभिन्न प्रकार के जुओं की तरह इसे भी बंद करने के लिए पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाया जायेगा.
